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अभिलेख और पुरातत्व क्षेत्र में हर साल 27 शोधार्थियों को मिलेगा मौका; 25 से 50 हजार रुपये मासिक फेलोशिप का प्रावधान
नई दिल्ली (Naren Danu) : दिल्ली की हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए दिल्ली सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजधानी के इतिहास, पुरातत्व और अभिलेखों पर वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने ‘अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप’ और ‘पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप’ योजनाओं को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास की जीवंत धरोहर है। इस विरासत का संरक्षण, दस्तावेजीकरण और नई पीढ़ी तक प्रमाणिक जानकारी पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। अभिलेखों के संरक्षण पर होगा फोकस मुख्यमंत्री ने बताया कि अभिलेखागार अनुसंधान फेलोशिप के तहत हर वर्ष 15 शोधार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित फेलो को उनकी योग्यता और शोध कार्य के आधार पर एक साल तक प्रतिमाह 25 हजार से 50 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस योजना के तहत पुराने सरकारी रिकॉर्ड के प्रबंधन, ऐतिहासिक दस्तावेजों के संरक्षण, डिजिटलीकरण, माइक्रो-फिल्मिंग, शोध एवं प्रकाशन तथा उर्दू और फारसी जैसी प्राचीन भाषाओं में उपलब्ध दस्तावेजों के अध्ययन को बढ़ावा दिया जाएगा। पुरातात्विक धरोहरों पर होगा गहन अध्ययन वहीं, पुरातत्व अनुसंधान फेलोशिप के तहत हर साल 12 शोधार्थियों को शामिल किया जाएगा। इन्हें भी एक वर्ष के लिए 25 हजार से 50 हजार रुपये मासिक फेलोशिप दी जाएगी। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और कम चर्चित विरासत स्थलों का अध्ययन एवं संरक्षण करना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे न केवल विरासत संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा। नई पीढ़ी के विशेषज्ञ तैयार करने की पहल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दोनों योजनाएं इतिहासकारों, पुरातत्व विशेषज्ञों, संरक्षण विशेषज्ञों, भाषाविदों और शोधकर्ताओं के लिए नए अवसर पैदा करेंगी। इससे दिल्ली की विरासत के अध्ययन को संस्थागत मजबूती मिलेगी और भविष्य के लिए विशेषज्ञों की नई पीढ़ी तैयार होगी। सरकार जल्द ही इन फेलोशिप योजनाओं के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया और चयन संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करेगी। इसके बाद दोनों योजनाओं को लागू किया जाएगा।