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New Delhi: आईवीएफ क्लीनिकों पर सख्ती की तैयारी, राष्ट्रीय महिला आयोग ने बनाई 11 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति - Uturn Time
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एआरटी केंद्रों और गामीट बैंकों के नियमों की होगी समीक्षा, महिलाओं के अधिकारों और पारदर्शिता पर रहेगा विशेष फोकस
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : देश में आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) और अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों (एआरटी) से जुड़े मामलों में बढ़ती अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है, जो आईवीएफ क्लीनिकों, एआरटी केंद्रों और गामीट (अंडाणु एवं शुक्राणु) बैंकों से जुड़े कानूनों और नियामक व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगी। समिति की अध्यक्षता दिल्ली हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशा मेनन करेंगी। समिति में चिकित्सा, कानून, फोरेंसिक, महिला स्वास्थ्य और प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों के साथ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रतिनिधि भी शामिल किए गए हैं। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने कहा कि देश में सभी एआरटी क्लीनिकों और गामीट बैंकों का राष्ट्रीय एआरटी एवं सरोगेसी रजिस्ट्री में पंजीकरण अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद नियमों के उल्लंघन और अनैतिक गतिविधियों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा आवश्यक हो गई है। आयोग ने यह भी चिंता जताई कि भारत में बढ़ते मेडिकल टूरिज्म के कारण कुछ लोग कानूनी प्रावधानों का दुरुपयोग करने का प्रयास कर सकते हैं। विशेष रूप से लिंग चयन जैसी प्रतिबंधित गतिविधियों और इलाज के नाम पर मरीजों के आर्थिक शोषण को रोकने के लिए कड़े मानकों की जरूरत बताई गई है। विशेषज्ञ समिति सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021, सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 तथा वर्ष 2026 में अधिसूचित संशोधित नियमों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगी। साथ ही मरीजों की सहमति, गोपनीयता, जैविक रिकॉर्ड की सुरक्षा और उपचार प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे पहलुओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा। समिति पूरे देश के लिए आईवीएफ और एआरटी केंद्रों की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की दिशा में भी काम करेगी, ताकि उपचार के लिए एक समान मानक लागू किए जा सकें और मरीजों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं पारदर्शी चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। राष्ट्रीय महिला आयोग का मानना है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में इस क्षेत्र में कानूनी और नीतिगत सुधार किए जा सकते हैं, जिससे आईवीएफ और एआरटी सेवाओं की निगरानी मजबूत होगी और महिलाओं के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।