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उद्घाटन के चार महीने में ही दरक गया “एडवांस” ट्रॉमा सेंटर, GMCH-32 में निर्माण गुणवत्ता पर बड़ा सवाल - Uturn Time
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अजीत झा. चंडीगढ़ 23 Jan । जिस ट्रॉमा सेंटर को चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वास्थ्य सेवाओं में मील का पत्थर बताया था, वही अब सवालों के घेरे में आ गया है। सेक्टर-32 स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के करोड़ों रुपये की लागत से बने एडवांस ट्रॉमा सेंटर में शुक्रवार को फॉल सीलिंग गिर गई। उद्घाटन के महज चार महीने बाद हुई इस घटना ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फासला उजागर कर दिया है। यह वही ट्रॉमा सेंटर है, जिसका उद्घाटन 8 अगस्त 2025 को प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने किया था। उस समय इसे रीजन का सबसे आधुनिक ट्रॉमा केयर सेंटर बताते हुए 283 बेड और 40 वेंटिलेटर जैसी सुविधाओं का दावा किया गया था। लेकिन इतनी कम अवधि में सीलिंग गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसा टला, लेकिन खतरा बरकरार घटना के समय संबंधित हिस्से में कोई मरीज या स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। हालांकि अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह घटना पीक इमरजेंसी या किसी बड़े सड़क हादसे के दौरान होती, तो परिणाम भयावह हो सकते थे। सेफ्टी ऑडिट पर उठे सवाल जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट में उद्घाटन से पहले स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होता है। सवाल यह है कि क्या इस ट्रॉमा सेंटर का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया गया था। अगर कराया गया था, तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई। नाम बड़ा, काम अधूरा एडवांस ट्रॉमा सेंटर को अत्याधुनिक बताया गया, लेकिन मौजूदा स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी बनी हुई है। कई जरूरी ट्रॉमा सेवाएं अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा ढांचा एक पूर्ण ट्रॉमा सेंटर की बजाय केवल इमरजेंसी सुविधाओं का विस्तार भर है। जवाबदेही पर चुप्पी करोड़ों रुपये की लागत से बने प्रोजेक्ट में मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी ऐसी खामी सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी या यह मामला भी कागजी जांच तक सीमित रह जाएगा। GMCH-32 ट्रॉमा सेंटर में फॉल सीलिंग गिरने की घटना ने एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य परियोजनाओं में गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।