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अगर मुखर्जी नहीं होते तो कश्मीर, असम और बंगाल का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में चला जाता: गृहमंत्री अमित शाह
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यदि डॉ. मुखर्जी का योगदान नहीं होता तो देश की वर्तमान भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति अलग होती। अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि डॉ. मुखर्जी ने जीवनभर “एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चल सकते” के सिद्धांत के लिए संघर्ष किया और इसी आंदोलन के दौरान उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 को हटाकर डॉ. मुखर्जी के सपने को साकार किया है। शाह के अनुसार यह कदम उनके उस विचार की पूर्ति है, जिसके लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित किया था। गृहमंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास को समझने वाले जानते हैं कि डॉ. मुखर्जी के प्रयासों के बिना असम और पश्चिम बंगाल का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान में चला गया होता, लेकिन उनके संघर्ष के कारण ये क्षेत्र भारत का हिस्सा बने रहे। अमित शाह ने बताया कि केंद्र सरकार डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती को पूरे देश में व्यापक स्तर पर मनाएगी और उनके विचारों को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी का मानना था कि भारत का शासन देश की सांस्कृतिक परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए, और उनका पूरा जीवन इसी विचार को समर्पित रहा।