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सुबह लगा नोटिस 2 घंटे बाद दिया गया फाड़, नगर परिषद की सांख दांव पर - Uturn Time
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अधिकारियों का रट्टा-रटाया बयान— हम करेंगे कानूनी कार्रवाई ज़ीरकपुर 23 Jan : अंबाला एक्सप्रेसवे पर स्थित माया गार्डन मैग्नीशिया एक बार फिर विवादों में घिर गया है। नगर परिषद की ओर से आज बड़ी कार्रवाई करते हुए माया गार्डन मैग्नीशिया के बेसमेंट को सील कर दिया गया। बेसमेंट के बाहर नगर परिषद द्वारा नोटिस चिपकाया गया है, जिसमें साफ शब्दों में लिखा है कि यह एरिया सील किया जा चुका है और यदि कोई भी व्यक्ति सील तोड़ने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में माया गार्डन मैग्नीशिया परिसर में संचालित रोमियो लेन रेस्टोरेंट की लिफ्ट को भी नगर परिषद द्वारा सील कर दिया गया है। नगर परिषद का कहना है कि यह लिफ्ट अवैध निर्माण के अंतर्गत आती है और बिल्डिंग बायलॉज का उल्लंघन करती है। लिफ्ट पर भी नोटिस चिपकाया गया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सील से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नगर परिषद से मिली जानकारी के अनुसार माया गार्डन मैग्नीशिया कई जरूरी कानूनी प्रक्रियाओं और बिल्डिंग शर्तों को पूरा करने में असमर्थ रहा है। बेसमेंट में आवश्यक मैकेनिकल एग्जॉस्ट सिस्टम की व्यवस्था नहीं पाई गई, वहीं फायर डोर भी स्थापित नहीं किए गए थे। इसके अलावा बिल्डिंग में मौजूद फायर फाइटिंग सिस्टम मैन्युअल मोड में पाया गया, जबकि नियमों के अनुसार इसे ऑटोमेटिक मोड में होना अनिवार्य है। फायर से जुड़ी आवश्यक शर्तें पूरी न होने के कारण नगर परिषद ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बेसमेंट को सील करने का फैसला लिया। साथ ही निर्माण नियमों का उल्लंघन करते हुए बिल्डिंग के बाहर बनाई गई वह अवैध लिफ्ट, जिसका इस्तेमाल रोमियो लेन रेस्टोरेंट में आने-जाने के लिए किया जा रहा था, उसे भी सील कर दिया गया है। बॉक्स नगर परिषद का नोटिस सिर्फ एक कागज़? हैरानी की बात यह है कि नगर परिषद की सख्त चेतावनी के बावजूद नोटिस की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। सुबह जिस लिफ्ट पर नगर परिषद द्वारा सीलिंग का नोटिस चिपकाया जाता है, वह नोटिस दिनदहाड़े फाड़कर हटा दिया जाता है और शाम होते-होते वही सील की गई लिफ्ट दोबारा चालू कर दी जाती है। यह सवाल खड़े करता है कि क्या नगर परिषद द्वारा लगाए गए नोटिस की कोई कानूनी मूल्य नहीं है, या फिर नियमों का उल्लंघन करने वालों के सामने नगर परिषद की कार्रवाई सिर्फ एक कागज़ी औपचारिकता बनकर रह गई है। जिस नोटिस में साफ-साफ लिखा होता है कि सील से छेड़छाड़ करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी, उसी नोटिस को मामूली कागज समझकर फाड़ दिया जाना प्रशासनिक सख्ती पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नोटिस हटाने और सील तोड़ने की इस कार्रवाई के बावजूद न तो मौके पर कोई त्वरित कार्रवाई दिखाई देती है और न ही दोबारा लिफ्ट चालू होने पर कोई रोक लगाई जाती है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर नगर परिषद की यह किस तरह की कार्रवाई है, जहां कानून तोड़ने वालों को खुली छूट मिलती नजर आ रही है। अब यह देखना अहम होगा कि नगर परिषद इस खुले उल्लंघन पर क्या ठोस कदम उठाती है या फिर नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों के हौसले इसी तरह बुलंद बने रहेंगे। कोटस “नोटिस के ऊपर साफ तौर पर लिखा है कि यदि नियमों का उल्लंघन हुआ तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अगर इसके बावजूद वहां लिफ्ट अभी भी चलाई जा रही है, तो हम निश्चित रूप से कानूनी कार्रवाई करेंगे। मुझे तो अभी आपसे ही जानकारी मिली है कि वहां लिफ्ट चल रही है।” परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद ज़ीरकपुर