जेपी नड्डा ने जारी किए संशोधित दिशा-निर्देश, अब जांच-उपचार और जनभागीदारी पर फोकस
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के संशोधित परिचालन दिशा-निर्देश जारी किए। इसके साथ ही कार्यक्रम को नए रूप में विस्तार देते हुए इसे अब केवल आयरन टैबलेट वितरण तक सीमित न रखकर व्यापक स्वास्थ्य और पोषण अभियान में बदल दिया गया है।
विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद की 16वीं बैठक के दौरान इन नए दिशा-निर्देशों को जारी किया गया। सरकार का लक्ष्य देश से एनीमिया (खून की कमी) की समस्या को प्रभावी ढंग से खत्म करना है।
नए बदलावों के तहत अब इस अभियान में केवल रोकथाम नहीं, बल्कि जांच, उपचार, संतुलित और आयरन युक्त आहार, तथा सामुदायिक जागरूकता यानी ‘जन चेतना’ पर विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार ने इसे रोकथाम आधारित मॉडल से आगे बढ़ाकर उपचार आधारित रणनीति में बदल दिया है।
नई गाइडलाइन में 0 से 6 महीने तक के कम वजन वाले शिशुओं को भी एक नए लाभार्थी समूह के रूप में शामिल किया गया है, ताकि जन्म से ही एनीमिया के खतरे को रोका जा सके। इसके अलावा ‘ईटिंग राइट’ यानी आयरन युक्त संतुलित आहार को अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
डिजिटल निगरानी प्रणाली को भी मजबूत किया गया है। गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड जननी पोर्टल, बच्चों का रिकॉर्ड आरबीएसके और यू-विन पोर्टल से जोड़ा जाएगा, जबकि सभी डेटा को एकीकृत एनीमिया मुक्त भारत पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे जांच, उपचार और फॉलो-अप की प्रक्रिया पर बेहतर निगरानी संभव होगी।
इसके साथ ही सरकार ने ‘जन भागीदारी’ अभियान की भी शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य एनीमिया को सामान्य समस्या मानने की सोच को बदलकर समाज को इसके खिलाफ सक्रिय बनाना है।
मंत्रालय के अनुसार, यह संशोधित अभियान मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु अनुपात में कमी लाने तथा देश में पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।