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आयुष्मान, हिमकेयर और प्राइवेट ग्रांट सेल तक फैला नेटवर्क, मास्टरमाइंड दुर्लभ कुमार अजीत झा | चंडीगढ़ 21 दिसंबर : चंडीगढ़ स्थित पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGI) में करोड़ों रुपये के एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है, जिसने देश की प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि आयुष्मान भारत, हिमकेयर और प्राइवेट ग्रांट सेल जैसी योजनाओं के तहत फर्जीवाड़ा कर मुफ्त दवाएं और आर्थिक मदद हड़पी गई, जिन्हें बाद में खुले बाजार में बेचा गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड पीजीआई की गोल मार्केट में फोटोस्टेट की दुकान चलाने वाला दुर्लभ कुमार है। सीबीआई ने हाल ही में दुर्लभ कुमार सहित पीजीआई के छह कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इससे पहले चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच उसे आयुष्मान और हिमकेयर घोटाले में गिरफ्तार कर चुकी है। फर्जी मुहरों से चलता था खेल जांच में खुलासा हुआ है कि डॉक्टरों और विभागाध्यक्षों की नकली मुहरों व फर्जी इंडेंट फॉर्म के जरिए अमृत फार्मेसी से महंगी दवाएं मुफ्त में निकाली जाती थीं। ये दवाएं बाद में नामी मेडिकल स्टोर्स पर 10 से 20 फीसदी छूट पर बेची जाती थीं। फरवरी 2025 में खुली पोल घोटाले का पर्दाफाश फरवरी 2025 में तब हुआ, जब एक युवक आयुष्मान कार्ड पर करीब 60 हजार रुपये की दवाएं लेने पहुंचा। तलाशी में फर्जी मुहरें और दस्तावेज बरामद हुए। पूछताछ में पूरा नेटवर्क सामने आया। गरीब मरीजों की ग्रांट में भी सेंध जांच में यह भी सामने आया कि प्राइवेट ग्रांट सेल में मृत मरीजों और फर्जी लाभार्थियों के नाम पर पैसा निकलवाकर आरोपियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। सीबीआई की एफआईआर में पीजीआई के कई कर्मचारियों और निजी लोगों को आरोपी बनाया गया है। यह घोटाला न केवल सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि गरीब मरीजों के हक पर डाका माना जा रहा है। अब सबकी नजर जांच में सामने आने वाले अगले बड़े नामों पर टिकी है।