भाजपा नेता की शिकायत से खुला राज
अजीत झा | चंडीगढ़:
देश के सबसे सुरक्षित शहरों में शुमार चंडीगढ़ में फर्जी नंबर प्लेट लगाकर अपराध करने की बड़ी साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर की दो कारों के शहर में घूमने की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मनीमाजरा इलाके से दो आरोपियों को कार सहित गिरफ्तार कर लिया। समय रहते की गई कार्रवाई से किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम दिए जाने से पहले ही पुलिस ने योजना को नाकाम कर दिया।
मामले का खुलासा तब हुआ जब भाजपा नेता प्रिंस ने पुलिस को शिकायत दी कि उनकी कार के पंजीकरण नंबर का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 11 दिसंबर 2025 को खरीदी गई उनकी नई कार का रजिस्ट्रेशन नंबर CH01DB 6443 है। 31 दिसंबर की रात सेक्टर-35 मार्केट के पास उन्होंने एक दूसरी कार देखी, जिस पर वही नंबर प्लेट लगी हुई थी।
शुरुआत में उन्होंने इसे भ्रम समझा, लेकिन घर फोन कर पुष्टि की तो उनकी कार सुरक्षित घर पर खड़ी मिली। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया जब 2 जनवरी 2026 को उनके मोबाइल पर विकास मार्ग से ट्रैफिक चालान का मैसेज आया। कुछ दिन बाद सेक्टर-31 से दूसरा चालान मिलने पर साफ हो गया कि कोई उनकी नंबर प्लेट का दुरुपयोग कर रहा है।
शिकायत के बाद सेक्टर-17 थाना पुलिस ने विशेष जांच टीम गठित की। जांच में सामने आया कि उसी फर्जी नंबर प्लेट वाली कार से हिमाचल प्रदेश के बद्दी इलाके में फास्टैग टोल भी कट चुका है। इसके अलावा 14 जनवरी को सेक्टर-25 और सेक्टर-38 के लाइट प्वाइंट से भी चालान जारी हुए, जिससे पुलिस की चिंता और बढ़ गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भाजपा नेता ने डीएसपी सेक्टर-17 से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद डायल-112 पर सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए देर रात मनीमाजरा क्षेत्र में नाकाबंदी कर संदिग्ध कार को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि उन्होंने इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित एक ऑटो पार्ट्स कंपनी से नंबर प्लेट चुराई थी और उसी फर्जी नंबर का इस्तेमाल कर शहर में बेखौफ घूम रहे थे। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल किसी बड़ी आपराधिक वारदात में किया जा सकता था, लेकिन समय पर मिली शिकायत और त्वरित कार्रवाई से एक गंभीर साजिश नाकाम हो गई। अब यह जांच की जा रही है कि आरोपियों ने इससे पहले किन गतिविधियों को अंजाम दिया और क्या इस वाहन का इस्तेमाल किसी अन्य अपराध में हुआ है।