जांच में देरी का फायदा, बैंक घोटाले का आरोपी जमानत पर रिहा
चंडीगढ़: हरियाणा के बहुचर्चित 645 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ा झटका लगा है। पंचकूला की अदालत ने समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के आधार पर आरोपी राजेश सांगवान को डिफॉल्ट बेल दे दी है।
पूर्व कंट्रोलर (फाइनेंस एंड अकाउंट्स), हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड रहे राजेश सांगवान को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने शनिवार को जमानत प्रदान की। अदालत ने माना कि निर्धारित वैधानिक अवधि के भीतर अंतिम रिपोर्ट (चार्जशीट) दाखिल नहीं की गई, जिससे आरोपी को स्वतः डिफॉल्ट बेल का अधिकार प्राप्त हो गया।
अदालत में बचाव पक्ष ने दलील दी कि सांगवान की पहली रिमांड 15 मार्च को हुई थी और 90 दिन की कानूनी अवधि 12 जून को पूरी हो चुकी थी। तय समय सीमा में चार्जशीट दाखिल न होने पर कानून के तहत जमानत मिलना अनिवार्य है। यह भी तर्क दिया गया कि जांच एजेंसी बदलने या बाद में पुलिस रिमांड मिलने से समयसीमा दोबारा शुरू नहीं होती।
वहीं, CBI ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सह-आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होने या पूरक रिपोर्ट आने से उस आरोपी के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता, जिसके मामले में जांच लंबित है।
यह मामला कथित बैंकिंग साजिश से जुड़ा है, जिसमें सरकारी धन को निजी खातों में ट्रांसफर करने के आरोप हैं। इस मामले की शुरुआती जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने की थी, जिसे बाद में CBI को सौंप दिया गया।