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बाल श्रम न केवल समाज के लिए न केवल अभिशाप बल्कि कानूनन अपराध भी है - मालती अरोड़ा
पानीपत: राज्य सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों की ओर से जून को बाल मजदूरी के खिलाफ कार्रवाई माह या ‘एक्शन मंथ’ के रूप में मनाने के बाबत जारी अधिसूचना व निर्देशों के तहत की गई। इन निर्देशों में बाल मजदूरी की शिकायत वाले इलाकों में छानबीन करने व बच्चों को मुक्त कराने के लिए साझा अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ जनजागरूकता अभियान में जिला प्रशासन , जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, स्टेट क्राइम ब्रांच, बाल कल्याण समिति, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग और समाज के जागरूक कार्यकर्ता शामिल हैं। एम डी डी ऑफ़ इंडिया बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए 250 से भी अधिक नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) का सहयोगी संगठन है। बच्चों से बेहद अमानवीय और शोषणकारी स्थितियों में काम लिया जा रहा है। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक स्थितियों में मामूली पैसे पर इन्हें दिन रात खटाया जाता है जिससे इनकी सेहत व मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। जून महीने को बाल श्रम के खिलाफ ‘एक्शन मंथ’ के तौर पर मनाया जाता है और चूंकि बाल दुर्व्यापार यानी बच्चों की ट्रैफिकिंग बाल मजदूरी का मुख्य कारण है, इसलिए नागरिक समाज संगठन इस दौरान पुलिस व प्रशासन के साथ मिलकर दुर्व्यापारियों और उनके गठजोड़ की शिनाख्त के लिए कड़ी नजर रखते हैं। इस मौके पर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और जिला प्रशासन को हरसंभव सहयोग का वादा करते हुए एम डी डी ऑफ़ इंडिया के निदेशक श्री सुरिंदर सिंह मान जी ने कहा, “शोषण व मजदूरी से मुक्त कराए गए हर बच्चे के शिक्षा के अधिकार, सुरक्षा व गरिमा की आज एक बार फिर बहाली हुई है। बाल श्रम बच्चों को उनके बचपन और मूल अधिकारों से महरूम कर देता है, लिहाजा इस समस्या से तत्काल निपटने की जरूरत है। बच्चों की जगह ढाबों और फैक्ट्रियों में नहीं बल्कि स्कूल में है। चूंकि ट्रैफिकिंग और बाल मजदूरी आपसे में गहरे तक जुड़े हैं, हम ट्रैफिकिंग की रोकथाम, बच्चों को मुक्त कराने के लिए जिला प्रशासन प्रशासन व कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ करीबी समन्वय के साथ काम करते रहेंगे। साथ ही, हम सुनिश्चित करेंगे कि हर बच्चे की देखभाल हो, समुचित पुनर्वास हो और उसे वो सभी सुविधाएं मिलें जिसका वह हकदार है।” इस नेटवर्क की सबसे बड़ी ताकत इसका साझा निगरानी तंत्र और आपसी सहयोग है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के देश भर में फैले सहयोगी संगठन एक दूसरे की आंख-कान का काम करते हैं और आपस में सूचनाएं साझा करने के साथ ट्रैफिकिंग के मामलों की निगरानी करते हैं। नेटवर्क के खुफिया सूचना-साझाकरण तंत्र ने देश के विभिन्न हिस्सों में ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों की पहचान करने, उनका पता लगाने और उन्हें मुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नतीजे में अप्रैल 2023 से मार्च 2026 के बीच 1.45 लाख से अधिक बच्चों को ट्रैफिकिंग से मुक्त कराया गया। इनमें अधिकांश मामले ऐसे थे, जिनमें बच्चों की ट्रैफिकिंग कर उन्हें बाल श्रम करने के लिए मजबूर किया गया था। इस जागरूकता अभियान में स्टेट क्राइम ब्रांच इंचार्ज एसआई संदीप कुमार, एएसआई जगबीर सिंह, हेड कांस्टेबल मुकेश कुमार, जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण से पैनल एडवोकेट नीलम, पैरा लीगल वॉलंटियर सुषमा, सीबीआई रिटायर्ड कर्मचारी सुभाष चंद, आरपीएफ एवं जीआरपी अधिकारी, एमडीडी ऑफ इंडिया से जिला समन्वयक संजय कुमार, अजय, सुमन, ज्योति शामिल रहे।