चंडीगढ़/यूटर्न/10 जून। क्या ममता बनर्जी की 'घर वापसी' होगी? यही सवाल पूछा जा रहा है। ममता ने 1997 में कांग्रेस छोड़ने के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) बनाई थी। जिस बात के बारे में एक हफ़्ते पहले सोचा भी नहीं जा सकता था, उस पर अब ज़ोरों से चर्चा हो रही है। राजनीति में कुछ भी अजीब नहीं होता। घटनाओं के एक अजीब सिलसिले की वजह से नई दिल्ली के मीडिया गलियारों में चर्चा तेज़ हो गई है। ज़रा इस पर गौर करें। ममता बनर्जी नई दिल्ली में हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में उनके विधायक बगावत पर उतर आए हैं। उनके पार्षदों और स्थानीय नेताओं पर भी हमले हो रहे हैं। संकट बंगाल में है, लेकिन वह दिल्ली में हैं। क्यों? ममता ने अपने भतीजे और टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की बैठक में हिस्सा लिया। ममता ने आखिरी बार 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में कब हिस्सा लिया था? टीएमसी, जो 29 लोकसभा और 12 राज्यसभा सीटों के साथ तीसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है, ने केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के खिलाफ़ अपनी अलग रणनीति बनाई थी। ममता की कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ नहीं बनी थी, तो अब यह नज़दीकी क्यों?
सोनिया गांधी से की बैठक
ममता बनर्जी ने मंगलवार को सोनिया गांधी के साथ आमने-सामने बैठक की, जो कई सालों में पहली बार हुई। बताया जा रहा है कि यह बैठक टीएमसी और गठबंधन की राजनीति के भविष्य पर थी। बुधवार को अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस के असल प्रमुख राहुल गांधी से मुलाकात की। खबर है कि ममता बुधवार को फिर से सोनिया से मिलेंगी। लगातार हो रही इन मुलाकातों का क्या मतलब है?
भाजपा की लहर में बह गई पार्टी
जो नेता कभी अडिग लगती थीं और जिस पार्टी को बंगाल में अजेय माना जाता था, वे भाजपा की लहर में बह गईं। यह भाजपा के पक्ष में उतना ही वोट था, जितना ममता और उनकी टीएमसी के खिलाफ़। एक दशक से ज़्यादा समय तक उनके कुशासन ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं। बंगाल की 294 सदस्यों वाली विधानसभा में टीएमसी सिमटकर सिर्फ़ 80 सीटों पर आ गई।
पार्टी से नियंत्रण खोया
चुनाव नतीजों के एक महीने के भीतर ही, टीएमसी की निर्विवाद सर्वेसर्वा रहीं ममता ने उस पार्टी पर अपना नियंत्रण खो दिया, जिसे उन्होंने 1998 में बनाया था। उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में कानूनी लड़ाई शुरू कर दी। लेकिन शिवसेना और एनसीपी के पिछले उदाहरणों को देखें तो उन्हें पता होगा कि उनके सफल होने की संभावना बहुत कम थी।
कांग्रेस के साथ कौन विलय कर रहा है ?
हालांकि, पार्टी से बगावत करने वाले बंगाल में विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी ने विलय की चर्चाओं के बीच अड़चन पैदा कर दी। उन्होंने दावा किया कि 64 बागी विधायक और लगभग 20 सांसद टीएमसी का कांग्रेस के साथ विलय करने के किसी भी कदम का समर्थन नहीं करेंगे। रिताब्रता बनर्जी ने कहा,"बागी खेमे में टीएमसी विधायकों की कुल संख्या बढ़कर 64 हो गई है। जब ममता बनर्जी द्वारा टीएमसी का कांग्रेस के साथ विलय करने की संभावनाओं के बारे में पूछा गया, तो रिताब्रता ने कहा, हमारे विधायक ऐसा नहीं करेंगे। 20 सांसद हैं जो कांग्रेस के साथ विलय नहीं करेंगे, तो फिर कौन विलय कर रहा है? कांग्रेस के साथ ऐसे विलय का कोई सवाल ही नहीं उठता।
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