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“नी आसरे दा आसरा” की मदद से करवाया भावुक पुनर्मिलन
यमुनानगर: मानव सेवा के क्षेत्र में समर्पित संस्था “नी आसरे दा आसरा” (मगरपुर, जिला यमुनानगर) ने एक बार फिर बिछड़े परिवार को मिलाकर मानवता की मिसाल पेश की है। लगभग वर्ष 2014 से अपने परिवार से बिछड़ी एक महिला को संस्था ने पूरे 12 वर्ष बाद उसके बेटों से मिलाया। संस्था के रिकॉर्ड के अनुसार, स्थानीय ग्रामीणों की सूचना पर साहा पुलिस थाना द्वारा महिला को गांव सबगा से 4 मई 2026 को आश्रम लाया गया था। उस समय वह अपनी पहचान और पता स्पष्ट रूप से बताने की स्थिति में नहीं थीं। करीब एक माह तक आश्रम में उनकी देखभाल, भोजन, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं, और संस्था की टीम लगातार उनके परिवार की खोज में जुटी रही। आधुनिक तकनीक की सहायता से अंततः परिजनों तक पहुँचने में सफलता मिली। परिजनों के अनुसार, महिला वर्ष 2014 में पति से हुई कहासुनी के बाद घर से निकल गई थीं। पीछे तीन छोटे बच्चे छूट गए। परिवार ने वर्षों तक उन्हें ढूँढा, परंतु कोई सुराग न मिलने पर यह मान लिया गया कि शायद उनकी कहीं मृत्यु हो चुकी है। दुखी मन से परिवार ने उन्हें मृत मानकर सारी रस्में भी निभा दीं। ऐसे में जब आश्रम से परिवार के पास फोन पहुँचा कि उनकी माँ जीवित एवं सुरक्षित हैं, तो बच्चों की ख़ुशी का ठिकाना न रहा। दिनांक 3 जून 2026 को महिला के बेटे सोनू कुमार सिंह, रोहित कुमार एवं कपिल कुमार (निवासी शहजादपुर, जिला बिजनौर, उत्तर प्रदेश) आश्रम पहुँचे और आवश्यक पहचान एवं सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपनी माँ को सम्मानपूर्वक घर ले गए। बरसों बाद माँ को सामने पाकर भावुक हुए बच्चों ने “नी आसरे दा आसरा” की पूरी टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। संस्था के प्रतिनिधियों ने बताया कि “नी आसरे दा आसरा” वर्तमान में 250 से अधिक निराश्रित, मानसिक रूप से अस्वस्थ, बेसहारा एवं जरूरतमंद लोगों की सेवा कर रहा है। संस्था का उद्देश्य केवल आश्रय देना ही नहीं, बल्कि बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से पुनः मिलाना और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान करना भी है। यह भावुक पुनर्मिलन इस बात का प्रमाण है कि समर्पित सेवा भावना और आधुनिक तकनीक के सहयोग से वर्षों पुरानी दूरियाँ भी मिटाई जा सकती हैं।