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जम्मू-कश्मीर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर जल शक्ति विभाग की नई भूमिका पर सवाल: शोकिया कुरैशी - Uturn Time
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श्रीनगर, 15 जनवरी: जम्मू-कश्मीर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए जल शक्ति विभाग को नोडल एजेंसी बनाए जाने के हालिया सरकारी आदेश ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों और प्राथमिकताओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पीडीपी की प्रवक्ता शोकिया कुरैशी ने इस फैसले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे विभागीय भूमिका और विशेषज्ञता के विपरीत बताया है। कुरैशी ने कहा कि घाटी के शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे कुत्तों के काटने, रेबीज़ फैलने और सार्वजनिक सुरक्षा व स्वच्छता को लेकर खतरा बढ़ गया है। ऐसे में इस गंभीर समस्या पर केंद्रित और विशेषज्ञ समाधान की आवश्यकता है, लेकिन जल शक्ति विभाग को यह जिम्मेदारी सौंपना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग का मुख्य कार्य पेयजल आपूर्ति, सिंचाई व्यवस्था, बाढ़ नियंत्रण और नदियों का प्रबंधन है। ऐसे विभाग को आवारा कुत्तों के प्रबंधन जैसी जिम्मेदारी देना इस धारणा को दर्शाता है कि विभाग अपने मूल दायित्वों को पूरी तरह पूरा कर चुका है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। शोकिया कुरैशी ने कहा कि आमतौर पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन में नसबंदी, टीकाकरण, शेल्टर की व्यवस्था और निरंतर निगरानी जैसे कार्य शामिल होते हैं, जिन्हें नगर निकायों, शहरी स्थानीय निकायों और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए। इसके विपरीत, जल शक्ति विभाग के इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी अब डॉग बाइट मामलों और नसबंदी अभियानों की निगरानी कर रहे हैं, जिससे पशु चिकित्सा विशेषज्ञों और स्थानीय निकायों की भूमिका गौण हो रही है। उन्होंने इस फैसले में निहित विडंबना की ओर इशारा करते हुए कहा कि जहां वरिष्ठ अधिकारी सेवानिवृत्ति के करीब होने के कारण इस बदलाव को सहजता से स्वीकार कर सकते हैं, वहीं कनिष्ठ कर्मचारियों पर एक असंबंधित और अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया है। यह शासन की उस व्यापक समस्या को दर्शाता है, जहां संस्थागत क्षमता और विशेषज्ञता को नजरअंदाज कर जिम्मेदारियां इधर-उधर कर दी जाती हैं, जिससे जवाबदेही कमजोर होती है और समाधान नौकरशाही में उलझकर रह जाते हैं। पीडीपी प्रवक्ता ने कहा कि शासन में जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन उतना ही जरूरी है, जितना किसी इंजीनियरिंग परियोजना में सटीक डिजाइन और समन्वय। गलत विभाग को गलत काम सौंपने से जनता तक व्यावहारिक समाधान पहुंचने में बाधा आती है। शोकिया कुरैशी ने कहा, “आवारा कुत्तों की समस्या एक गंभीर शहरी चुनौती है, जिसके लिए समन्वित, विशेषज्ञ और जवाबदेह व्यवस्था की जरूरत है। इसे किसी असंबंधित विभाग को सौंपना कागजी औपचारिकता तो पूरी कर सकता है, लेकिन इससे न तो कार्यकुशलता बढ़ेगी और न ही जनता का भरोसा बहाल होगा।” इस पूरे मामले ने एक बार फिर इस बात को रेखांकित किया है कि जम्मू-कश्मीर में नागरिक समस्याओं के समाधान के लिए सही विभाग को सही जिम्मेदारी सौंपना कितना आवश्यक है।