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New Delhi: ग्रेट निकोबार परियोजना पर कांग्रेस नेता ने उठाए सवाल, ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर फिर गरमाई बहस - Uturn Time
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ग्रेट निकोबार को लेकर केंद्र सरकार को लिखा पत्र
नई दिल्ली। कांग्रेस महासचिव (संचार) एवं पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर पर्यावरणीय नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (ईआईए), मंजूरी प्रक्रिया और मूल्यांकन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने कहा कि मार्च 2022 की ईआईए रिपोर्ट में स्वयं यह स्वीकार किया गया था कि अध्ययन केवल प्रारंभिक और त्वरित आकलन पर आधारित था। उनका आरोप है कि परियोजना जैसे संवेदनशील क्षेत्र के लिए व्यापक और बहु-मौसमी पर्यावरणीय अध्ययन नहीं किए गए, जबकि ऐसे बड़े विकास कार्यों के लिए विस्तृत प्राथमिक आंकड़ों का संग्रह आवश्यक होता है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने अप्रैल 2023 के अपने आदेश में पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़े कुछ अनुत्तरित प्रश्नों और कमियों की ओर संकेत किया था। रमेश ने तटीय कटाव, जैव विविधता और पर्यावरणीय प्रभावों के विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता पर भी जोर दिया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि परियोजना के अध्ययन और समीक्षा से जुड़े संस्थान एक ही प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत आते हैं, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि द्वीपीय क्षेत्रों में प्रस्तावित बंदरगाह परियोजनाओं के लिए विभिन्न मौसमों में विस्तृत अध्ययन किया जाना चाहिए था। वहीं, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उनका कहना है कि ग्रेट निकोबार परियोजना का मूल्यांकन पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना-2006, द्वीप तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना-2019 तथा अन्य लागू प्रावधानों के अनुरूप व्यापक और बहुस्तरीय तरीके से किया गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और जैव विविधता संबंधी पहलुओं की वैधानिक और न्यायिक स्तर पर समीक्षा की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि ग्रेट निकोबार द्वीप में लगभग 166 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में प्रस्तावित इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत ट्रांसशिपमेंट कंटेनर बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय स्तर का द्वैध उपयोग हवाई अड्डा, ऊर्जा अवसंरचना और एक हरित तटीय शहर विकसित किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना के कारण लगभग 13 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होने का अनुमान है।