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चंडीगढ़/यूटर्न/2 जून। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) में एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल में, नरेंद्र मोदी सरकार ने सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह और सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। साथ ही, ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं की खरीद की जांच के आदेश दिए हैं। यह कदम परीक्षा से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में कथित अनियमितताओं पर सरकार के सख्त रुख का संकेत है। यह तब हुआ जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। यह कदम सीबीएसई की मूल्यांकन और रिजल्ट के बाद की प्रक्रियाओं की हफ्तों तक चली जांच के बाद उठाया गया है, जिसने पूरे देश में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच चिंता पैदा कर दी थी। तबादले से पहले, सीबीएसई चेयरमैन राहुल सिंह (आईएएस) बोर्ड के समग्र कामकाज की देखरेख करते थे, जिसमें परीक्षाएं, अकादमिक मामले, संबद्धता, नीतियों का कार्यान्वयन और बड़े सुधार शामिल थे। इसके साथ ही वे शिक्षा मंत्रालय के साथ समन्वय भी करते थे। सेक्रेटरी हिमांशु गुप्ता शासन, वित्त और संबद्धता जैसे प्रमुख प्रशासनिक कार्यों की कमान संभालते थे। उन्होंने सीबीएसई के दैनिक कार्यों और देश भर में फैले इसके स्कूल और परीक्षा नेटवर्क में नीतियों के कार्यान्वयन में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। सरकार ने जांच के आदेश दिए इस कार्रवाई के तहत, केंद्र सरकार ने एस. राधा चौहान की अध्यक्षता में एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। यह समिति ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सेवाओं की खरीद की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। हालांकि समिति के कार्यक्षेत्र का विस्तृत विवरण अभी प्रतीक्षित है, लेकिन उम्मीद है कि यह जांच इस बात पर केंद्रित होगी कि कॉन्ट्रैक्ट कैसे दिया गया और क्या सभी प्रक्रियाओं का उचित रूप से पालन किया गया था। ये घटनाक्रम इस बात का संकेत हैं कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है, क्योंकि भारत की सबसे बड़ी स्कूल परीक्षा प्रणालियों में से एक में पारदर्शिता, तकनीक और जवाबदेही को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। सीबीएसई सुर्खियों में क्यों रहा? यह विवाद तब शुरू हुआ जब सीबीएसई की कक्षा 10 और 12 के रिजल्ट घोषित होने के बाद, छात्रों ने अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को देखने में आ रही दिक्कतों की शिकायत की। कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें धुंधले पेज, गायब हिस्से और बोर्ड की ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थिति तब और बिगड़ गई जब ओएसएम प्लेटफॉर्म और उस टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए, जिसके माध्यम से डिजिटल मूल्यांकन का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। वेंडर चयन प्रक्रिया, साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं और पुनर्मूल्यांकन सेवाओं में हुई देरी को लेकर चल रही चर्चाओं ने जनता का ध्यान और भी अधिक आकर्षित किया। ----