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जिले भर के समूह सेवा केंद्रों के कर्मचारियों की ओर से मिनी सचिवालय के समक्ष दिया रोष धरना
रोष धरने में बैठे प्रदर्शनकारियों ने कहा के जब तक सरकार उनकी मांगे पूरी नहीं करती धरना निरंतर जारी रहेगा
होशियारपुर (दलजीत अजनोहा) : जिले भर के समूह सेवा केंद्रों के कर्मचारियों द्वारा मिनी सचिवालय के सामने रोष धरना दिया गया, जो आज तीसरे दिन में था। आज इस रोष धरने में शामिल पदाधिकारियों ने अपनी मांगे संबंधित मांग-पत्र डिप्टी कमिशनर हुषियारपुर मैडम आशिका जैन व अन्य अधिकारियों को सौंपा। मांग-पत्र में प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें थीं, जिनमें उल्लेख है कि सेवा केंद्र विभाग, जो पंजाब सरकार का एक संस्था है और जिसके संचालन के लिए सरकार ने एक निजी कंपनी को नियुक्त किया है, के संबंध में समूह सेवा केंद्र कर्मचारियों की ओर से विनम्र निवेदन किया जा रहा है कि इस प्रणाली में कर्मचारियों के साथ काफी शोषण हो रहा है। सेवा केंद्रों में 400 से अधिक सेवाएं एक छत के नीचे दी जाती हैं। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के कार्य लगातार चलते हैं। सेवा केंद्रों में भारी भीड़ होने के बावजूद भी कर्मचारी पूरा दिन डटकर ड्यूटी पर रहते हैं। कई बार भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि 30 मिनट का लंच ब्रेक लेने का समय भी नहीं मिलता। हमारे ऊपर कार्य का काफी बोझ है। कई बार सरकारी योजनाओं के लागू होने पर हजारों लोगों का सामना रोजाना करना पड़ता है। इतना अधिक काम करने के बाद कंपनी द्वारा कर्मचारियों को मात्र लगभग ₹10,000 ही वेतन दिया जाता है जो कि एक सामान्य मज़दूर की मजदूरी से भी कम है। सेवा केंद्र का कार्यकाल कम-से-कम 10 वर्ष हो चुका है, परंतु सेवा केंद्र के कर्मचारियों की तनख्वाह आज भी लगभग वही ₹10,000 के आस-पास है जो 10 साल पहले थी। क्या यह न्यायसंगत है कि एक निजी कंपनी कर्मचारियों की तनख्वाह को अनदेखा करे? निजी कंपनी कई बार तनख्वाह में कटौती करती है। ₹10,000 में से भी पैसा काटना एक गरीब कर्मचारी का शोषण करने के समान है। कंपनी ने कर्मचारियों का बोनस भी समय पर नहीं दिया। कंपनी अपनी मर्जी से बोनस थोड़ा-थोड़ा करके, किसी को कम और किसी को ज़्यादा, एक अपारदर्शी तरीके से दे रही है। अभी भी बोनस पूरा नहीं दिया गया है। कंपनी SLA के नाम पर बिना कारण बताए तनख्वाहों में पैसे काटती है। कंपनी द्वारा वेतन देने का समय भी नियत नहीं किया गया है। जब भी कर्मचारी वेतन वृद्धि की मांग करते हैं, कंपनी उसे टाल देती है और अनदेखा कर देती है। सेवा केंद्र कर्मचारी 400+ सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। लगभग 20+ विभागों का कार्य सेवा केंद्र कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। कर्मचारी पूरा दिन सार्वजनिक सेवाएँ देते हैं और भीड़ अत्यधिक होने पर भी वे कर्तव्यनिष्ठा से काम करते हैं। सरकार द्वारा प्रत्येक नई योजना लागू होने पर भी सेवा केंद्र कर्मचारियों को कैंप पर ड्यूटी दी जाती है और वे अपनी हर जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हैं। सरकार द्वारा दी गई हिदायतों के अनुसार सेवा केंद्र कर्मचारी DSD द्वारा घर जाकर भी सेवाएँ प्रदान करते हैं, जो सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक होती हैं। सरकार द्वारा घोषित किए गए 10 लाख के बीमे वाले कार्ड की सेवाएँ भी सेवा केंद्र के कर्मचारियों द्वारा निभाई जाती हैं। सरकार द्वारा घोषित नए प्रोजेक्ट्स और योजनाओं की सेवाएँ भी सेवा केंद्र द्वारा ही प्रदान की जाती हैं। सेवा केंद्रों में दी जाने वाली सेवाओं की फीस का बड़ा हिस्सा कंपनी के पास जाता है। हम चाहते हैं कि सरकार का पैसा सीधे सरकार के पास रहे ताकि सरकारी कार्यकलाप बेहतर ढंग से चलते रहें। हम सारा दिन सरकार का काम करते हैं, पर हमें एक निजी कंपनी के अधीन क्यों रखा गया है? हम मेहनती हैं और अच्छा काम करते हैं। हमारी कुछ मांगे हैं, जिन पर ध्यान रखते हुए हम आपको यह मांग-पत्र दे रहे हैं। हम समूह कर्मचारी अपनी मांगों के लिए हड़ताल पर बैठे हैं। मांगें: हमारी तनख्वाह में वृद्धि की जाए। हमें निजी कंपनी के अधीन न रखा जाए; हमें सरकारी विभाग के अधीन नियमित (रैगुलर) किया जाए। पंजाब स्तर पर सभी जिलों में सेवा केंद्रों की हड़ताल जारी है। और जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होंगी, तब तक असीमित समय के लिए हड़ताल जारी रहेगी। हम काफी समय से ₹10,000 की गरीबी में जी रहे हैं। कृपया हमारी इस उम्मीद को ध्यान में रखते हुए हमारी मांगें पूरी की जाएँ। तारीख 29-05-2026 को समूह सेवा केंद्र कर्मचारियों ने डिप्टी कमिशनर साहिब के पास मांग-पत्र सौंपा था। उसी दिन कंपनी ने हमारे कुछ कर्मचारियों को CONTRACT CLOSER पत्र जारी कर दिए। क्या हम अपनी मांग भी सरकार के सामने नहीं रख सकते? क्या हम ऐसे सिस्टम का हिस्सा हैं जहाँ सुनवाई का कोई नाम तक नहीं है? निजी कंपनी द्वारा कर्मचारियों के साथ जो अन्याय हो रहा है, वह वर्तमान सरकार के कार्यकाल में शोषण का कारण बन रहा है। इसलिए आज हम आपके पास अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए आए हैं। हमें अपनी मांगें पूरी करवाने हेतु आपके सहयोग की अत्यंत आवश्यकता है। हमें आपके सहयोग की पूर्ण उम्मीद है। जिन कर्मचारियों को मांग-पत्र देने पर CONTRACT CLOSE किया गया है, उन्हें बहाल किया जाए। हमें निजी कंपनी के अधीन रखने की बजाय सरकारी विभाग के अधीन नियमित किया जाए। हमारी तनख्वाह में वृद्धि की जाए। हमें निजी कंपनी से मुक्ति दी जाए; हम सरकारी विभाग के अधीन नियमित करना चाहते हैं। हम समूह कर्मचारी आपके आजीवन आभारी रहेंगे।