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Chandigarh: पंजाब में रोजगार नीति में बड़ा बदलाव, 65 हजार कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, नौकरी होगी नियमित - Uturn Time
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कर्मचारियों को स्थायी करने का फैसला, सरकार का बड़ा कदम, ठेकेदारी प्रथा खत्म, कर्मचारियों को मिलेगा स्थायी दर्जा
चंडीगढ़: Punjab सरकार ने कर्मचारियों के हित में बड़ा ऐलान करते हुए 65,000 कर्मचारियों को नियमित करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही राज्य में ठेकेदारी प्रथा को खत्म करने की दिशा में भी अहम कदम उठाया गया है। यह फैसला मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में लिया गया, जिसका उद्देश्य कर्मचारियों को स्थायित्व देना और उनके अधिकारों को मजबूत करना है। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से लंबे समय से अस्थायी या ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उन्हें नियमित वेतन, भत्ते व अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। Punjab सरकार ने कर्मचारियों के हित में बड़ा ऐतिहासिक फैसला लेते हुए 65,000 से अधिक आउटसोर्स और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नियमित करने का रास्ता साफ कर दिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में शनिवार को हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया। सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य सरकारी रोजगार व्यवस्था से निजी ठेकेदारों की भूमिका खत्म कर सरकार और कर्मचारियों के बीच सीधा संबंध स्थापित करना है। लंबे समय से बिना नियमित दर्जे के काम कर रहे कर्मचारियों को अब रोजगार सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व मिलेगा। कैबिनेट ने ‘पंजाब एडहॉक, कॉन्ट्रैक्टुअल, डेली वेज, टेम्पररी, वर्क चार्ज्ड एंड आउटसोर्स्ड एम्प्लॉयीज वेलफेयर एक्ट, 2016’ को निरस्त करने के साथ दो नए विधेयकों— ‘पंजाब स्टेट आउटसोर्स्ड पर्सनल (ट्रांजिशन टू कॉन्ट्रैक्टुअल एंगेजमेंट) बिल, 2026’ और ‘पंजाब कॉन्ट्रैक्टुअल पर्सनल (मंजूरशुदा खाली असामियों विरुद्ध एब्जॉर्प्शन) बिल, 2026’ को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि राज्य के हजारों कर्मचारियों ने वर्षों तक सेवाएं दी हैं और अब उन्हें उनका हक दिया जा रहा है। इस फैसले के बाद कोई भी ठेकेदार कर्मचारियों और सरकार के बीच नहीं रहेगा। नई व्यवस्था के तहत, पांच साल की निरंतर सेवा पूरी करने वाले ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के आउटसोर्स कर्मचारी सीधे सरकारी अनुबंध के तहत लाए जाएंगे। इसके बाद 10 साल की सेवा पूरी करने पर उन्हें नियमित पदों पर समायोजित करने पर विचार किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह सुधार 51 विभागों के 65,048 कर्मचारियों को प्रभावित करेगा, जिनमें से 26,000 से अधिक कर्मचारियों को पहले चरण में लाभ मिलेगा। इनमें बिजली क्षेत्र के 15,753 कर्मचारी, स्थानीय निकायों के 8,436 कर्मचारी, सहकारी संस्थाओं के 8,373 कर्मचारी, स्कूल शिक्षा के 7,704 कर्मचारी, परिवहन विभाग के 4,746 कर्मचारी और फायर सेवाओं के 1,472 कर्मचारी शामिल हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य, जल आपूर्ति, कृषि, जेल, तकनीकी शिक्षा, पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों के हजारों कर्मचारियों को भी इस फैसले का लाभ मिलेगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ेगी, प्रशासनिक पारदर्शिता आएगी और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके अलावा ठेकेदारी प्रथा खत्म होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और सरकारी विभागों में कार्यप्रणाली अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। सरकार ने संबंधित विभागों को इस फैसले के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।