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राजदीप सिंह सैनी लुधियाना/यूटर्न/29 मई। लुधियाना कारोबार का हब होने के चलते यहां रोजाना कई सो करोड़ रुपए का बिजनेस होता है। लेकिन इस कारोबारी शहर के कई व्यापारियों को उन्हीं के रिश्तेदारों द्वारा अपने केंद्रीय जांच एजेंसियों में शामिल अधिकारी रिश्तेदारों के साथ मिलकर लूटा और ठगा जा रहा है। जैसे पहले बॉलीवुड की फिल्म स्पेशल-26 में कारोबारियों के यहां रेड कर उन्हें लूटा जाता था, वैसे ही अब लुधियाना में फर्जी नहीं रियल स्पेशल-26 टीम बनी हुई है। फिल्म में तो सभी अधिकारी फर्जी थे, लेकिन शहर में बनी इस टीम में अधिकारी असली है। इसी स्पेशल-26 की टीम ने बाजवा नगर के एक होजरी कारोबारी से 40 लाख रुपए की ठगी मारी थी। इस मामले का खुलासा होते ही शहर में बवाव मच गया है। शुक्रवार को यह मामला टॉक ऑफ टाउन बना रहा। पूरा दिन लोग केंद्रीय जांच एजेंसी में मौजूद अधिकारी व उसके ठग रिश्तेदार का नाम पूछते रहे। यहां तक कि जांच एजेंसी में भी अधिकारी इस मामले संबंधी आपस में बातचीत करते नजर आए। वहीं इस मामले के उजागर होते ही इस ठग टीम के कई और कारनामे भी निकलकर सामने आए हैं। जिसमें उन्होंने एक-दो नहीं बल्कि कई लोगों को डरा धमकाकर अपना शिकार बनाया है। यह भी बात सामने आई है कि जांच एजेंसी के उच्च अधिकारियों द्वारा अपने उक्त भ्रष्ट अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही थी। लेकिन समय रहते मामला शांत होने पर बचाव हो गया। केस बंद करने की एवज में लेते थे मोटी रकम चर्चा है कि उक्त ठग व्यक्ति द्वारा अपने केंद्रीय जांच एजेंसी में लगे रिश्तेदार अधिकारी द्वारा सिर्फ डरा धमकाकर वसूली नहीं की जाती थी। बल्कि लोगों के केस बंद कराने को भी मोटी रकम ली जाती थी। उन्होंने इस तरह कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया। उसकी और से शहर के लोगों के एजेंसी के केस बंद कराने की एवज में मोटी रकम वसूली की जाती थी। जिसके बाद सेटिंग कर केस रफा दफा करवाए जाते थे। अब इस खुलासे के बाद ठगी का शिकार हुए लोगों को अपने पैसे वापिस होने की उम्मीद है। ठग कंपनी का खुलासे करने में दिल्ली व्यापारी बना आधार चर्चा है कि उक्त व्यक्ति द्वारा बाजवा नगर के जिस कारोबारी से ठगी की गई थी। उसके कई वेंडर भी इस ठग कंपनी के निशाने पर आ गए थे। जिसमें से दिल्ली के एक बड़े वेंडर से पांच करोड़ रुपए मांगे गए। लेकिन उस वेंडर व्यापारी ने पैसे देने से इंकार कर दिया और मामले की जांच करवाई। जिसके बाद पता चला कि जांच एजेंसी के नाम पर की जा रही एक्वांयरी फर्जी है। विभागीय कार्रवाई से बचने को पैसे दिए वापिस चर्चा है कि बाजवा नगर के कारोबारी से 40 लाख रुपए की ठगी की गई थी। उस मामले में जांच एजेंसी को भी शिकायत हो गई थी। जांच एजेंसी द्वारा अपने भ्रष्ट अधिकारी खिलाफ 56जे धारा के तहत कार्रवाई शुरु कर दी गई थी। लेकिन इस बीच अधिकारी ने पेमेंट वापिस कर दी। जिसके बाद अधिकारी का बचाव हो सका। पूरे खेल में एजेंसी के लैंडलाइन नंबर का हुआ इस्तेमाल चर्चा है कि स्पेशल-26 के मुख्य किरदार अधिकारी द्वारा जब भी किसी को डराना या पैसों की सेटिंग करनी होती थी तो पूरे खेल में केंद्रीय जांच एजेंसी के ही लैंडलाइन नंबर का प्रयोग किया जाता था। क्योंकि उक्त नंबरों से किसी को कॉल करने पर एजेंसी का नाम लिखा आता था, जिससे सामने वाला व्यक्ति डर जाता था। वहीं अगर कोई बैक कॉल भी करता था, तो एजेंसी में ही फोन उठाया जाता था। जिससे उन्हें यकीन हो जाता था। 3-4 साल से चल रहा था खेल चर्चा है कि यह खेल पिछले 3-4 साल से चल रहा था। दरअसल, होजरी कारोबार में काफी पैसा कैश में भी आता है। इसी बात का फायदा उठाकर अधिकारी का रिश्तेदार पूरी जानकारी पहले इकट्ठी करता था। फिर अधिकारी तक पहुंचाकर धमकाता था। चर्चा है कि इनकी और से कई और लोगों को भी अपनी ठगी का शिकार बनाया है। जिस संबंधी जल्द खुलासे हो सकते हैं। एजेंसी की चुपी पर सवाल वहीं शहर में चर्चा है कि एजेंसी की इंटेलिजेंस इतनी तेज होती है कि देश के हर व्यापारी की जानकारी उनके पास होती है। लेकिन फिर उन्हें अपने अधिकारी द्वारा एजेंसी के नाम पर ही किया जा रहा खेल, क्यों दिखाई नहीं दे सका। एजेंसी की चुपी पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। यह है पूरा मामला दरअसल, बाजवा नगर के एक होजरी व्यापारी का रिश्तेदार उसे मिलने अक्सर फैक्ट्री आता जाता था। इस दौरान उसने व्यापारी के कारोबार में कमियां ढूंढ ली। जिसके बाद अपने केंद्रीय जांच एजेंसी में लगे रिश्तेदार को वे जानकारी भेज दी। उक्त अधिकारी ने कारोबारी को कॉल कर कार्रवाई की बात कहकर डराया। जिसके बाद सेटिंग करके 40 लाख रुपए ले लिए। लेकिन जब व्यापारी के दिल्ली स्थित वेंडर ने जांच करवाई तो खुलासा हुआ। जिसके बाद व्यापारी की पेमेंट भी वापिस हुई। ----