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सरकार सख्त, फरीदाबाद मेयर और पार्षदों को भेजा नोटिस
फरीदाबाद: Faridabad नगर निगम में बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। सरकार ने मेयर सहित 46 पार्षदों को नोटिस जारी किया है। सूत्रों के अनुसार, यह नोटिस विभिन्न प्रशासनिक और कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर जारी किया गया है। संबंधित जनप्रतिनिधियों से निर्धारित समय के भीतर जवाब देने को कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। दरअसल, नगर निगम चुनाव 2 मार्च 2025 को हुए थे और 25 मार्च को मेयर व पार्षदों ने शपथ भी ले ली थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव नहीं कराया गया है। इसके अलावा, नगर निगम की सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट्स कमेटी का गठन भी अब तक नहीं हो सका है, जिससे वित्तीय और विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इसी तरह की लंबित प्रक्रियाओं को लेकर सरकार ने सख्ती दिखाई है और मेयर समेत पार्षदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। इस पूरे मामले ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्थानीय राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सरकार का कहना है कि नगर निगम की बैठकें नियमित रूप से नहीं हो रही हैं और Haryana Municipal Corporation Act के प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा। जारी नोटिस में अधिनियम की धारा 398(1) का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। Faridabad नगर निगम विवाद में सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि तय समय में संतोषजनक जवाब न मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जारी नोटिस में कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर सरकार स्वयं कमेटी गठित कर विकास कार्यों की जिम्मेदारी अपने हाथ में ले सकती है। साथ ही नगर निगम आयुक्त को भी आदेश की प्रति भेजी गई है और 29 मई तक जवाब सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस पूरे मामले में अब सभी की नजर मेयर और पार्षदों के जवाब पर टिकी हुई है, जिससे आगे की कार्रवाई तय होगी। इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।