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मां कामाक्षी दरबार में हुए नतमस्तक, भारतीय संस्कृति अनादि परंपराओं की धरोहर: खन्ना
होशियारपुर (दलजीत अज्नोहा) : शिवालिक पर्वत माला के आंचल में स्थित मां कामाक्षी दरबार कमाही देवी में धार्मिक अनुष्ठान में भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, पूर्व सांसद एवं पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अविनाश राय खन्ना और भाजपा दसूहा विधानसभा चुनाव क्षेत्र इंचार्ज रघुनाथ राणा विशेष तौर पर शामिल हुए। इस अवसर पर तपोमूर्ति महंत राज गिरि जी महाराज ने अविनाश राय खन्ना को सम्मानित किया। उपस्थिति को संबोधित करते हुए खन्ना ने कहा कि जब इस सृष्टि में पहला सूर्योदय हुआ होगा, और सृष्टि पर पहली किरण ने अपना आलोक फैलाया तभी से सनातन धर्म और हमारी कालजयी संस्कृति अस्तित्व में आई। खन्ना ने कहा सनातन का अर्थ है जो शाश्वत है जो सत्य है जो कभी नष्ट न हो। उन्होंने कहा हमारी संस्कृति में ऋषियों मुनियों ने ऐसे ऐसे आदर्श और मानवता के पथ प्रदर्शक सिद्धांत, वेदों, शास्त्रों, पुराणों और उपनिषदों, तथा गीता में स्थापित किए जो जब तक इस सृष्टि का अस्तित्व रहेगा वे हमारी संस्कृति की विजय पताका फहराते रहेंगे। अविनाश राय खन्ना ने कहा कि जीवन का विकास भी सर्वप्रथम भारतीय दक्षिण प्रायद्वीप में नर्मदा नदी के तट पर हुआ, जो विश्व की सर्वप्रथम नदी है। यहां पूरे विश्व में डायनासोरों के सबसे प्राचीन अंडे एवं जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत विश्व की सबसे प्राचीन भाषा है तथा समस्त भारतीय भाषाओं की जननी है। ‘संस्कृत’ का शाब्दिक अर्थ है ‘परिपूर्ण भाषा’। संस्कृत से पहले दुनिया छोटी-छोटी, टूटी-फूटी बोलियों में बंटी थी जिनका कोई व्याकरण नहीं था और जिनका कोई भाषा कोष भी नहीं था। भाषा को लिपियों में लिखने का प्रचलन भारत में ही शुरू हुआ। ब्राह्मी और देवनागरी लिपियों से ही दुनियाभर की अन्य लिपियों का जन्म हुआ। ब्राह्मी लिपि एक प्राचीन लिपि है जिसे देवनागरी लिपि से भी प्राचीन माना जाता है। हड़प्पा संस्कृति के लोग इस लिपि का इस्तेमाल करते थे, तब संस्कृत भाषा को भी इसी लिपि में लिखा जाता था। जैन पौराणिक कथाओं में वर्णन है कि सभ्यता को मानवता तक लाने वाले पहले तीर्थंकर ऋषभदेव की एक बेटी थी जिसका नाम ब्राह्मी था। उसी ने इस लेखन की खोज की। प्राचीन दुनिया में सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे बसी सभ्यता सबसे समृद्ध, सभ्य और बुद्धिमान थी। इसके कई प्रमाण मौजूद हैं। यह वर्तमान में अफगानिस्तान से भारत तक फैली थी। खन्ना ने कहा प्राचीनकाल में जितनी विशाल नदी सिंधु थी उससे कहीं ज्यादा विशाल नदी सरस्वती थी। दुनिया का पहला धर्मग्रंथ सरस्वती नदी के किनारे बैठकर ही लिखा गया था। पुरातत्त्वविदों के अनुसार यह सभ्यता लगभग 9,000 ईसा पूर्व अस्तित्व में आई थी, 3,000 ईसापूर्व उसने स्वर्ण युग देखा और लगभग 1800 ईसा पूर्व आते-आते किसी भयानक प्राकृतिक आपदा के कारण यह लुप्त हो गया। एक ओर जहां सरस्वती नदी लुप्त हो गई वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र के लोगों ने पश्चिम की ओर पलायन कर दिया।