13.1.2026
कितने भी संदेश दो, कौन रहा है मान।
थोड़ा-थोड़ा सुधरते, कटते जब चालान।
कटते जब चालान, सुधरते थोड़ा-थोड़ा।
ज्यों ही डंडा हटे, दुलत्ती झाड़े घोड़ा।
कह साहिल कविराय, लोग हैं अड़ियल इतने।
जूं ना रेंगे कान, संदेशे दे लो कितने।
प्रस्तुति --- डॉ. राजेन्द्र साहिल