बदलते समय में भारत की तैयारी को लेकर अहम संदेश
पिथौरागढ़: शुक्रवार को ‘भारत के पड़ोस में रणनीतिक संस्कृति: निरंतरता, विरोधाभास और समकालीन निहितार्थ’ विषय पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में भारत को अधिक सजग, सक्षम और रणनीतिक रूप से तैयार रहने की आवश्यकता है।
विशेषज्ञों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पड़ोसी देशों की नीतियों और क्षेत्रीय चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षा रणनीति को लगातार मजबूत और आधुनिक बनाना जरूरी है।
संगोष्ठी का उद्देश्य भारत के पड़ोसी देशों की रणनीतिक सोच, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनके प्रभावों को लेकर गहन विचार-विमर्श करना था। कार्यक्रम में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, रणनीतिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, छात्रों एवं एनसीसी कैडेटों ने भाग लिया। वक्ताओं ने सीमा प्रबंधन, सैन्य रणनीति, ग्रे ज़ोन वारफेयर, सूचना युद्ध, अवसंरचना विकास और क्षेत्रीय प्रभाव की प्रतिस्पर्धा जैसे समकालीन विषयों पर विस्तार से चर्चा की।
संगोष्ठी के दौरान पंचशूल ब्रिगेड और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य अकादमिक सहयोग, शोध, ज्ञान आदान-प्रदान और युवाओं में रणनीतिक अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करना है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने युवाओं में विश्लेषणात्मक सोच, रणनीतिक जागरूकता और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। संगोष्ठी का समापन तेजी से बदलते सुरक्षा वातावरण में सामूहिक तैयारी और रणनीतिक दूरदर्शिता को मजबूत करने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
आयोजित संगोष्ठी के संबंध में जानकारी देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल चेतन सिंह कबसूड़ी, जनसंपर्क अधिकारी (रक्षा) ने कहा कि भारतीय सेना युवाओं और शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद बढ़ाकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूकता विकसित करने के लिए लगातार ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
अधिकारी ने कहा कि सेना और शैक्षणिक संस्थानों के बीच यह संवाद भविष्य के जिम्मेदार नागरिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता और सहभागिता बढ़ती है।