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Fatehgarh Sahib: पंजाब में सदियों पुराना पेड़ लोगों के लिए कौतूहल का विषय, पंजाब में प्राकृतिक धरोहर का अनोखा उदाहरण - Uturn Time
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Punjab में 300 साल पुराना विशाल पेड़ बना आकर्षण का केंद्र
फतेहगढ़ साहिब: राज्य में एक विशाल और प्राचीन पेड़ लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। करीब 300 साल पुराना यह पेड़ अपनी फैली हुई जड़ों और विशाल छत्रछाया के कारण इलाके में कौतूहल पैदा कर रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पेड़ की जड़ें और शाखाएं लगभग आठ एकड़ क्षेत्र में फैली हुई हैं, जिससे यह पूरे इलाके में एक प्राकृतिक साम्राज्य जैसा दृश्य प्रस्तुत करता है। सुबह-शाम बड़ी संख्या में लोग इसे देखने और इसकी तस्वीरें लेने पहुंच रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह पेड़ न केवल जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह क्षेत्र की ऐतिहासिक और प्राकृतिक धरोहर का भी प्रतीक है। गांव के लोगों के अनुसार यह बरोटी हर दिन और फैलती जा रही है। इसकी जड़ें लगातार धरती में आगे बढ़ रही हैं और जहां तक यह फैलती हैं, वहां किसान अपनी जमीन पर ट्रैक्टर और हल चलाना छोड़ देते हैं। गांव वाले उस हिस्से को खाली छोड़कर पेड़ को आगे बढ़ने देते हैं। गांव के लोग इसे “बाबा जी के अंग-पैर” मानते हैं और इसकी एक टहनी तक तोड़ने से डरते हैं। लोगों का विश्वास है कि यह बरोटी मनोकामनाएं पूरी करती है और जो व्यक्ति इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, उसे भारी हानि उठानी पड़ती है। गांव की बुजुर्ग महिलाओं और किसानों ने बताया कि वर्षों पहले कुछ लोगों ने इस बरोटी को काटने का प्रयास किया था, लेकिन बाद में उनके साथ दुर्घटनाएं हुईं और कई लोगों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। इसी कारण आज भी कोई व्यक्ति इसकी टहनी काटने या पत्ता तोड़ने की हिम्मत नहीं करता। गांव में प्रचलित मान्यता के अनुसार कई दशक पहले एक साधु यहां खेतों में आकर ठहरे थे। उस समय एक किसान दंपती निसंतान था। साधु ने किसान की पत्नी को भभूति दी और आशीर्वाद दिया, लेकिन किसान ने उस पर विश्वास नहीं किया और वह भभूति साधुओं की धूनी में डाल दी गई। गांव वालों के अनुसार कुछ समय बाद उसी स्थान पर एक छोटा पौधा उग आया, जो धीरे-धीरे विशाल बरोटी में बदल गया। लोगों का कहना है कि जिस तरह किसान का परिवार बढ़ा, उसी तरह यह बरोटी भी लगातार फैलती चली गई। आज भी गांव के लोग इस कथा को श्रद्धा के साथ सुनाते हैं और बरोटी को चमत्कारी मानते हैं। गांव वालों के अनुसार बरोटी की जड़ें और शाखाएं लगातार खेतों तक फैलती जा रही हैं। जिस खेत तक इसकी जड़ें पहुंचती हैं, वहां किसान ट्रैक्टर और हल चलाना बंद कर देते हैं। कई किसानों ने अपनी जमीन का हिस्सा पेड़ के लिए छोड़ दिया है, ताकि बरोटी बिना रोक-टोक आगे बढ़ सके। करीब आठ एकड़ में पहले इस पेड़ को लोग प्यार से बरोटी कहते हैं। जिसकी शाखाएं जमीन तक झुककर नई जड़ें बना लेती हैं। यही जड़ें आगे चलकर नए तनों का रूप लेती हैं और पेड़ लगातार फैलता जाता है। दूर से देखने पर यह किसी घने जंगल जैसा दिखाई देता है। बरोटी के भीतर सैकड़ों पक्षी, मोर और अन्य जीव-जंतु रहते हैं। गांव वालों का कहना है कि गर्मियों में भी यहां ठंडक बनी रहती है। पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी प्राकृतिक धरोहर से कम नहीं है। जहां एक ओर विकास के नाम पर बड़ी संख्या में पेड़ काटे जा रहे हैं, वहीं चोलटी खेड़ी की यह बरोटी लोगों को प्रकृति बचाने का संदेश दे रही है। गांव वालों का कहना है कि पंजाब में ऐसे और अधिक प्राकृतिक क्षेत्र और जंगल होने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके। गांव के निवासी डॉ. मोहनलाल के अनुसार करीब चार वर्ष पहले पेरिस से एक विशेष टीम यहां पहुंची थी। उनके साथ मुंबई और चंडीगढ़ के कई शोधकर्ता भी आए थे। टीम ने इस विशाल बरोटी का इतिहास तैयार किया और इस पर शोध कार्य भी किया। डॉ. मोहनलाल ने बताया कि पंजाब सरकार का जंगलात विभाग भी समय-समय पर इस वृक्ष का निरीक्षण करता है। विभाग की ओर से इसकी जड़ों में दवाई डाली जाती है ताकि दीमक या अन्य बीमारी से पेड़ को नुकसान न पहुंचे। डॉ. मोहनलाल ने बताया कि करीब 25 वर्ष पहले फतेहगढ़ साहिब के तत्कालीन एडिशनल डिप्टी कमिश्नर दविंदर वालिया द्वारा यहां एक मंदिर का निर्माण करवाया गया था। उन्होंने बताया कि बरोटी के नीचे बना प्राचीन शिव मंदिर आज भी लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है, जहां साधु-संत निवास करते हैं। डॉ. मोहनलाल के अनुसार करीब दो वर्ष पहले बरोटी का एक बड़ा हिस्सा झुक गया था। लोगों को लगा कि अब यह हिस्सा सूख जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद वहीं से नई मजबूती के साथ वह दोबारा खड़ा हो गया। गांव के लोग इसे चमत्कार के रूप में देखते हैं। हर वर्ष अगस्त महीने में यहां विशाल भंडारा आयोजित किया जाता है। दूर-दूर से लोग अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं और बरोटी के नीचे बने शिव मंदिर में माथा टेकते हैं। भंडारे में दाल, रोटी, सब्जी, जलेबी और अन्य मिष्ठान वितरित किए जाते हैं। गांव वालों के अनुसार इस दौरान हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। गांव की एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि कई साल पहले एक व्यक्ति बरोटी की शाखा काटने के लिए हथियार लेकर आया था। उन्होंने उसे रोकते हुए कहा था कि यह “बाबा जी के अंग-पैर” हैं और इन्हें नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। महिला के अनुसार उस व्यक्ति ने उनकी बात नहीं मानी और बाद में उसका दुर्घटना में बड़ा नुकसान हो गया। महिला ने बताया कि आज भी आसपास के गांवों से लोग यहां श्रद्धा के साथ आते हैं और इस बरोटी को प्रणाम करते हैं।