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पंजाब/यूटर्न/16 मई। गुरदासपुर में तैनात पीसीएस अफसर एसडीएम अनुप्रीत कौर रंधावा को जमीन अधिग्रहण घोटाले की आरोपी होने के चलते गिरफ्तार कर लिया गया है। तरनतारन पुलिस ने शनिवार सुबह 7 बजे उन्हें गुरदासपुर स्थित सरकारी कोठी से अरेस्ट किया। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उनकी गिरफ्तारी 1.63 करोड़ रुपए के गबन केस में की गई है। यह केस राजस्थान-जम्मू कश्मीर हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़ा है। जब यह गबन हुआ तो अनुप्रीत रंधावा उस वक्त तरनतारन के पट्‌टी में तैनात थीं। उस वक्त उन्हें सस्पेंड भी किया गया था। 8 साल पहले के इस मामले में गबन के आरोप लगने के बाद उन्हें काफी समय तक फील्ड ड्यूटी से भी दूर रखा गया लेकिन कुछ समय पहले ही गुरदासपुर में तैनाती मिली थी। जहां एसडीएम के पास उनके पास नगर कौंसिल का भी अतिरिक्त चार्ज था। अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप एसडीएम अनुप्रीत पर आरोप है कि राजस्थान-जम्मू कश्मीर नेशनल हाईवे के निर्माण समय सरकार के भूमि अधिग्रहण दौरान तत्कालीन तरनतारन की एसडीएम डॉ. अनुप्रीत कौर ने उन लोगों को लाभ पहुंचाया, जिनके पास जमीन नहीं थी। पट्टी के पूर्व एसडीएम नवराज बराड़ ने तत्कालीन डीसी प्रदीप सभ्रवाल को 2018 को इस गबन के संबंध में शिकायत दी। बराड़ की जांच के आधार पर 5 सितंबर 2019 को थाना सिटी पट्‌टी में मुकदमा नंबर 47 जुर्म 419, 420, 409, 120बी आईपीसी के तहत दर्ज हुआ। 5 लोगों का माल विभाग में रिकॉर्ड नहीं मिला एफआईआर में लिखा कि माल विभाग रिकॉर्ड के मुताबिक केस में नामजद अपात्र 5 लोगों की जमीन नेशनल हाईवे-54 के लिए एक्वायर नहीं की गई। न ही माल विभाग में इनका कोई रिकॉर्ड है। केंद्र सरकार की ओर से 5 जुलाई 2013 के पब्लिश गजट ऑफ इंडिया में सब डिवीजन पट्टी के आते 6 गांवों, ततला, हरिके, नत्थूपुर, बूह, मरहाना, जौनेके, में नेशनल हाईवे 54 के लिए जमीन एक्वायर करने का नोटिफिकेशन जारी किया था। जांच में पाया गया कि इन 5 व्यक्तियों के नाम नोटिफिकेशन में शामिल नहीं हैं। इसी के आधार पर बैंक खातों की जांच की गई। जिसमें इन्हें पेमेंट एसडीएम के हस्ताक्षर के बाद ट्रांसफर हुई थी।