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पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और आगामी खरीफ सीजन के दौरान पंजाब में सुचारू खरीद और उठान कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए धान के कुछ हाइब्रिड बीजों के नोटिफिकेशन को रद्द करने हेतु उनके हस्तक्षेप की मांग की, साथ ही केंद्र के समक्ष राज्य के किसानों से संबंधित कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। दिल्ली में हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने निर्बाध उर्वरक आपूर्ति और भूजल संरक्षण का भरोसा दिलाते हुए केंद्रीय बीज समिति में पंजाब के प्रतिनिधित्व की मांग की और 2026-27 के लिए गेहूं बीज सब्सिडी आवंटन पर जोर दिया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब के किसानों ने केंद्र के 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा अब मक्का, दालें, तिलहन, सूरजमुखी और बाजरा के माध्यम से फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि धान की खेती पर निर्भरता कम की जा सके, तेजी से घट रहे भूजल भंडारों को बचाया जा सके और पंजाब को राज्य के कृषि भविष्य के लिए खतरा बने डार्क जोन संकट से बाहर निकाला जा सके। केंद्रीय कृषि मंत्री से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रस्तावित बीज विधेयक-2025 के तहत केंद्रीय बीज समिति में पंजाब के प्रतिनिधित्व की जोरदार पैरवी की और राज्य में फसल विविधीकरण एवं कृषि सुधारों के लिए केंद्र से अधिक समर्थन की मांग की। मुख्यमंत्री ने शिवराज सिंह चौहान को बताया कि यद्यपि पंजाब देश की आबादी का मात्र 2 प्रतिशत है, लेकिन देश के अन्न भंडार में यह सालाना लगभग 185 लाख मीट्रिक टन चावल और 125 लाख मीट्रिक टन गेहूं का योगदान देता है, जिस कारण पंजाब को देश का अन्नदाता कहा जाता है। खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए निर्बाध आपूर्ति के महत्व पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है। बीज विधेयक-2025 का मुद्दा उठाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “कृषि प्रधान राज्य होने के नाते, पंजाब राष्ट्रीय खाद्य पूल में बड़ा योगदान देता है, इसलिए केंद्रीय बीज समिति में इसका उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों के हितों और कृषि क्षेत्र की रक्षा के लिए राज्य स्तरीय बीज समिति की वर्तमान भूमिका और शक्तियों में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। हाइब्रिड धान के बीजों पर चिंताएं व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने बताया, “धान के कुछ हाइब्रिड बीजों में मिलिंग के दौरान दाना टूटने की उच्च दर देखी गई है और अनुशंसित किस्मों की तुलना में हेड राइस रिकवरी भी कम पाई गई है। ऐसी उपज भारतीय खाद्य निगम द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, जिसके कारण खरीद के दौरान किसानों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।” मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “आगामी खरीफ सीजन-2026 के मद्देनजर, पंजाब में इन हाइब्रिड धान के बीजों में से कुछ बीजों का नोटिफिकेशन रद्द करने के लिए प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि किसान समुदाय के व्यापक हित में सुचारू खरीद और उठान कार्यों को सुनिश्चित किया जा सके।” पंजाब द्वारा उठाए गए मुद्दों के जवाब में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को भरोसा दिया कि हाइब्रिड धान के बीजों के मुद्दे की जांच करने और राज्य में सुचारू खरीद कार्यों को सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष समिति बनाई जाएगी। एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे को उजागर करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “गेहूं के उत्पादन को बनाए रखने के लिए सालाना लगभग 33 प्रतिशत गेहूं के बीज को बदलने की आवश्यकता होती है। पंजाब में कृषि उत्पादकता को बेहतर बनाने के लिए बीज बदलने की दर को बढ़ाना समय की आवश्यकता है।” केंद्र से सहायता की मांग करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शिवराज सिंह चौहान से कृषि उन्नति योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना के लिए गेहूं बीज सब्सिडी की स्वीकृति और वितरण का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “कृषि क्षेत्र के व्यापक विकास और किसानों के कल्याण के लिए ऐसा करना अत्यंत आवश्यक है। यह वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में मदद करेगा, जिससे उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि होगी।” मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से पंजाब में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण सहयोग की मांग की, ताकि किसानों को धीरे-धीरे गेहूं-धान के चक्र से बाहर निकाला जा सके। उन्होंने आगे कहा, “विविधीकरण न केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने बल्कि पंजाब में तेजी से घट रहे भूजल भंडारों को बचाने के लिए भी आवश्यक है।” भूजल की चिंताजनक स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “पंजाब के कुल 150 ब्लॉकों में से 117 ब्लॉकों में भूजल स्तर पहले ही डार्क जोन में प्रवेश कर चुका है।” उन्होंने केंद्र सरकार से वैकल्पिक फसलों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) लागू करने की अपील की, ताकि किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, किसानों के लिए बेहतर आय सुनिश्चित की जा सके और राज्य के जल संसाधनों का संरक्षण किया जा सके।