डेराबस्सी 12 Jan : विधानसभा क्षेत्र में अवैध रेत खनन का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। ककराली, सूंडरा और भांखरपुर के बाद अब गांव अमलाला में भी दिनदहाड़े घग्गर नदी से रेत निकालकर खुलेआम बेची जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह गैरकानूनी गतिविधि प्रशासन की नाक के नीचे चल रही है, लेकिन न तो माइनिंग विभाग और न ही प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है। गांव की पंचायत भी इस पूरे मामले में मूकदर्शक बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध खनन से एक ओर जहां सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर गांव की आवाजाही के लिए बनाए गए पुल का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। घग्गर नदी के किनारों से बेतरतीब ढंग से रेत निकाले जाने के कारण नदी का बहाव और जलस्तर बदल रहा है, जिससे पुल की नींव कमजोर होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में बड़े जान-माल के नुकसान से इनकार नहीं किया जा सकता।
हैरानी की बात यह है कि अवैध खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद संबंधित विभागों की ओर से न तो छापेमारी की जा रही है और न ही प्रशासन इसे रोकने के लिए गंभीर नजर आ रहा है। इसी कारण ग्रामीणों में यह चर्चा आम है कि बिना मिलीभगत के इस तरह का कारोबार संभव नहीं है।
अवैध खनन से पुल को खतरा : पूर्व सरपंच बलिहार बाली
गांव अमलाला के पूर्व सरपंच बलिहार सिंह बाली ने बताया कि बरसात के मौसम में घग्गर नदी में आए तेज पानी के कारण पुल को पहले ही काफी नुकसान पहुंच चुका है। मौजूदा समय में नदी किनारे हो रहा अवैध रेत खनन खतरे को और बढ़ा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द अवैध खनन नहीं रोका गया तो पुल का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।
खेत मालिक अपने खेतों से निकाल रहे हैं रेत : सरपंच अमलाला
अवैध खनन के आरोपों पर जब गांव के मौजूदा सरपंच हरनिंदर सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि घग्गर किनारे स्थित खेतों के मालिक अपने निजी खेतों से ही रेत निकाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि गांव की सरकारी जमीन पर किसी तरह का अवैध खनन नहीं हो रहा है।
फोटो कैप्शन:
गांव अमलाला में घग्गर नदी से दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए रेत निकालते हुए।