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लुधियाना/यूटर्न/12 मई। एटीआईयू ने भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जीएसटी और आयकर में हालिया विकास और सुधारों पर एक इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किया। इस सत्र में प्रिंसिपल कमिश्नर सीजीएसटी सुग्रीव मीना और एडिशनल कमिश्नर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट राजीव वड़ेरा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उद्योगपतियों, कर विशेषज्ञों और व्यापार जगत के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। एटीआईयू के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने सरकार द्वारा किए गए जीएसटी सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने और कर प्रणाली के डिजिटलीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई वस्तुओं पर जीएसटी स्लैब का युक्तिकरण, रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया को आसान बनाना और कर के दोहराव को कम करने से उद्योग को लाभ हुआ है तथा उपभोक्ताओं पर बोझ कम हुआ है। आईटीसी लेते समय रहे सावधान इस दौरान प्रिंसिपल कमिश्नर सीजीएसटी सुग्रीव मीना ने जीएसटी व्यवस्था में हाल के संशोधनों और नीतिगत पहलों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार तकनीक आधारित प्रणाली के माध्यम से अनुपालन को मजबूत कर रही है, जिसमें डेटा एनालिटिक्स, एआई आधारित जांच और सख्त सत्यापन शामिल हैं। उन्होंने ई-इनवॉइसिंग, रियल टाइम इनवॉइस मिलान और जीएसटी रिटर्न को ई-वे बिल से जोड़ने की व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला, जिससे फर्जी बिलिंग और धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा रही है। उन्होंने उद्योगों को चेतावनी दी कि इनपुट टैक्स क्रेडिट लेते समय सावधानी बरतें और लेन-देन से पहले उचित जांच करें। नई कर व्यवस्था के लाभों और प्रभावों पर चर्चा वहीं राजीव वधेरा ने आयकर प्रणाली में हाल के बदलावों, विशेषकर नई कर व्यवस्था के लाभों और प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि करदाताओं को पारदर्शिता और वित्तीय अनुशासन अपनाना चाहिए तथा डिजिटल सिस्टम के बढ़ते उपयोग के चलते सही रिपोर्टिंग जरूरी है। व्यापारियों ने सांझी की समस्याएं सत्र के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने व्यापार में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और अनुपालन संबंधी चुनौतियों पर सवाल उठाए। अधिकारियों ने सलाह दी कि डिजिटल टूल्स, जीएसटी पोर्टल और केवाईसी प्रक्रियाओं का उपयोग कर व्यापारिक साझेदारों की जांच की जाए। सत्र के अंत में विचारों का आदान-प्रदान हुआ, जिसे सदस्यों ने अत्यंत उपयोगी बताया। ----