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डेराबस्सी 11 Jan : प्रदेश की मंडियों में आलू के दामों में अचानक आई भारी गिरावट से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मौजूदा समय में आलू मात्र तीन रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इस कीमत पर उन्हें अपनी कुल लागत का 50 प्रतिशत भी वापस नहीं मिल पा रहा है, जबकि बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई जैसे खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं। किसानों के अनुसार इस वर्ष आलू की पैदावार अच्छी हुई है, लेकिन बाजार में एक साथ अधिक आवक होने के कारण दाम औंधे मुंह गिर गए हैं। मजबूरी में कई किसानों को अपनी फसल बेहद कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। कोल्ड स्टोरेज की सुविधा महंगी होने के कारण किसान आलू को लंबे समय तक सुरक्षित भी नहीं रख पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरों का किराया इतना अधिक है कि कम दाम के दौर में फसल को स्टोर करना भी घाटे का सौदा बन जाता है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि जिस तरह अनाजों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय किया जाता है, उसी तरह सब्जियों के लिए भी एमएसपी निर्धारित की जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही उन्होंने आलू को कोल्ड स्टोरेज में रखने के लिए सब्सिडी देने की भी मांग उठाई है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए तो आने वाले समय में किसान आलू की खेती से पीछे हट सकते हैं, जिसका असर बाजार और उपभोक्ताओं पर भी पड़ेगा। फोटो कैप्शन: आलू की खुदाई करते