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"जगराओं में गांव नाम को लेकर सियासी जंग, अकाली-आप में तनातनी"
जगरांव (चरणजीत सिंह चन्ना): जगरांव के निकटवर्ती गांव 'कोठे अठ चक्क' का नाम बदलने का विवाद अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक ओर जहां पूर्व विधायक एस.आर कलेर ने मौजूदा विधायक सर्वजीत कौर माणुके पर बिना तथ्यों के बयानबाजी करने का आरोप लगाया है, वहीं प्रशासनिक रिकॉर्ड और गांव में लगा दो दशक पुराना नींव पत्थर इस पूरे विवाद की एक अलग ही तस्वीर पेश कर रहा है। अकाली दल का पक्ष: एस.आर कलेर का पलटवार: शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज एस.आर कलेर ने एक प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि गांव के असली नाम के साथ कथित तौर पर बिना प्रशासनिक मंजूरी के "बलदेव सिंह वाला" शब्द जोड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि डिप्टी कमिश्नर लुधियाना को सबूत सौंपे जाने के बाद प्रशासन ने पंचायत को अपनी मुहर और लेटरपैड पर केवल 'कोठे अठ चक्क' लिखने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही, शुगर मिल बंद होने के मामले में विधायक माणुके द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कलेर ने स्पष्ट किया कि मिल साल 2004 में बंद हुई थी, जबकि उनका अपना राजनीतिक सफर (बतौर विधायक) 2012 में शुरू हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक अपना खिसकता जनाधार देखकर बेबुनियाद बयानबाजी कर रही हैं। प्रशासनिक स्पष्टीकरण: क्या कहते हैं अधिकारी? इस पूरे मामले की कानूनी स्थिति स्पष्ट करते हुए बीडीपीओ सुरजीत चंद ने बताया कि डिप्टी कमिश्नर लुधियाना द्वारा जारी 2024 के आधिकारिक पंचायती चुनाव रिकॉर्ड में गांव का नाम "कोठे अठ चक्क आबादी बलदेव सिंह वाला" ही दर्ज है। लेकिन, ग्राम पंचायत का आधिकारिक नाम केवल "कोठे अठ चक्क" है। उन्होंने बताया कि उनके संज्ञान में आया था कि मौजूदा सरपंच अशोक कुमार ने "कोठे अठ चक्क बलदेव सिंह वाला" नाम से मुहर और लेटरपैड बनवा लिया है, जो कि गैर-आधिकारिक था। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए सरपंच को सख्त हिदायत दी है कि भविष्य में केवल आधिकारिक नाम (ग्राम पंचायत कोठे अठ चक्क) का ही उपयोग किया जाए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। हकीकत बयां करता साल 2000 का नींव पत्थर: इस पूरे विवाद का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि जिस नाम को लेकर आज दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर हमलावर हैं, उसी गांव में साल 2000 का एक नींव पत्थर लगा हुआ है। गांव वालों के अनुसार, यह पत्थर शिरोमणि अकाली दल की सरकार के समय तत्कालीन विधायक भाग सिंह मल्ला द्वारा लगवाया गया था। इस पत्थर पर स्पष्ट शब्दों में गांव का नाम "कोठे अठ चक्क बलदेव सिंह वाला" लिखा हुआ है। इसमें तत्कालीन सरपंच व मार्केट कमेटी चेयरमैन बलदेव सिंह और एसजीपीसी मेंबर हरसुरिंदर सिंह गिल के नाम भी अंकित हैं। निष्कर्ष: सरकारी दस्तावेजों और पुराने नींव पत्थर के तथ्यों को देखने से यह स्पष्ट होता है कि गांव के नाम के साथ "बलदेव सिंह वाला" जुड़ा होना कोई नई घटना नहीं है। हालांकि, तकनीकी और कानूनी रूप से ग्राम पंचायत का नाम सिर्फ "कोठे अठ चक्क" है, जिसे प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है। इसके बावजूद, इस पुराने मुद्दे को तूल देना आगामी चुनावों के मद्देनजर की जा रही राजनीतिक रस्साकशी का ही हिस्सा प्रतीत होता है।