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"खेत तक पहुंच बंद होने से परेशान किसान, न्याय की गुहार"
डेराबस्सी: ब्लॉक डेराबस्सी के अंतर्गत गांव बरौली में पंचायती रास्ते और शामलात भूमि को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के निवासी कमलदीप सिंह पुत्र जसवीर सिंह ने ग्राम पंचायत बरौली के सरपंच हरविंदर सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि निशानदेही (सीमांकन) होने के बावजूद उनके खेत तक जाने वाला रास्ता अब तक नहीं खोला गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार उनके पिता की भूमि खसरा नंबर 1165 और 1166 में स्थित है, जिसके साथ खसरा नंबर 1180 दर्ज ‘गैर-मुमकिन रास्ता’ लगता है। उनका आरोप है कि उक्त रास्ते तथा उससे सटी पंचायत की शामलात भूमि पर कुछ व्यक्तियों ने सरपंच की कथित मिलीभगत से अवैध कब्जा कर लिया है, जिसके कारण उनके खेत तक आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। कमलदीप सिंह ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों को शिकायत दी थी। मामले पर संज्ञान लेते हुए डायरेक्टोरेट ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग, एसएएस नगर (मोहाली) ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) को निर्देश जारी कर सात दिन के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था। इसके बावजूद, पीड़ित का आरोप है कि अब तक न तो कब्जा हटवाया गया है और न ही रास्ता खुलवाया गया है। दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पंचायत बरौली ने भी प्रस्ताव पारित कर संबंधित खसरा नंबरों की निशानदेही करवाने के लिए तहसीलदार डेराबस्सी को पत्र भेजा था। निशानदेही की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि खसरा नंबर 1182 से 1188 तक लगभग 29 बीघा पंचायत भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है और इसे बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के उपयोग में लाया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि इस भूमि की नियमानुसार नीलामी कराई जाए तो इससे ग्राम पंचायत को आय प्राप्त हो सकती है, जो विकास कार्यों में खर्च की जा सकती है। मामले को गंभीर बनाते हुए उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरपंच के पुत्र पर पूर्व में जान से मारने की धमकी देने और हथियार दिखाने जैसे आरोप लग चुके हैं, जिससे उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है। फिलहाल, पीड़ित परिवार प्रशासन से न्याय की मांग कर रहा है और रास्ता खुलवाने तथा पंचायत भूमि से अवैध कब्जा हटाने की अपील कर रहा है। अब यह देखना शेष है कि संबंधित विभाग इस मामले में कब तक प्रभावी कार्रवाई करता है।