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"यूटी प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, सुप्रीम कोर्ट में AAP नेताओं के खिलाफ मामला"
चंडीगढ़(अजीत झा): पुलिस के साथ कथित झड़प और प्रशासनिक आदेशों के उल्लंघन से जुड़े पुराने मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। चंडीगढ़ प्रशासन ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया का दरवाजा खटखटाया है। यह मामला करीब छह साल पुराना है, जब आम आदमी पार्टी के नेता जिनमें हरपाल सिंह चीमा और अमन अरोड़ा भी शामिल हैं इनके खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की हुई और कुछ जवान घायल हुए। हाईकोर्ट से मिली थी राहत: पिछले वर्ष पंजाब एंड हरयाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ी राहत देते हुए संबंधित नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया था। अब यूटी प्रशासन ने इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिससे मामला फिर से कानूनी बहस के केंद्र में आ गया है। 2020 के प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद: जानकारी के मुताबिक, यह घटना 10 जनवरी 2020 की है, जब सेक्टर-3 थाना क्षेत्र में आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। इसी दौरान एक महिला कांस्टेबल की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज हुआ था। एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और धक्का-मुक्की की, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हुई। अब सुप्रीम कोर्ट में होगी अगली सुनवाई: चंडीगढ़ प्रशासन के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शीर्ष अदालत में चलेगी। यह देखना अहम होगा कि हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट क्या रुख अपनाता है।इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी हलकों में हलचल तेज कर दी है।