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गारमेंट और इंजीनियरिंग कम्पनी के बाद अब निजी हॉस्पिटल को मिली 1200 करोड़ की ऑफर !
अशोक सहगल लुधियाना यूटर्न 1 मई : पिछले कुछ समय से बाहरी प्रदेशों और विदेशी निवेशकों का ध्यान पंजाब के बड़े प्रॉफिटेबल बिजनेस को एक्वायर करने की और केंद्रित नजर आ रहा है। ताज़ा मामला विदेशी निवेशक द्वारा एक निजी हॉस्पिटल में निवेश कर बड़ा स्टेक लेने का सुर्ख़ियों में बना हुआ है। चर्चाओं अनुसार विदेशी निवेशक द्वारा निजी हॉस्पिटल की करीब 1200 करोड़ रु की वैल्यूएशन लगा उसमें करीब ४०% स्टेक लेने का बात कही जा रही है। चर्चाओं अनुसार निवेशको द्वारा हॉस्पिटल की मैनेजमेंट में बदलाव ना करते हुए फंड कर इसे चेन ऑफ हॉस्पिटलस में तब्दील किए जाने की योजना है जिसके लिए हॉस्पिटल मैनेजमेंट को पहली किश्त भी रिलीज की जा चुकी है हलाकिन यह राशि प्रमोटर्स को जालंधर , पटियाला के अन्य चिन्हित हॉस्पिटल को अपने में शामिल करने के लिए रिलीज की गई है। ताकि भविष्य में हॉस्पिटल ब्रांड को और मजबूती देते हुए इसका बड़े स्तर पर आईपीओ लाया जा सके। पहले भी हुई है ऐसी डिलें ऐसा पहली बार नहीं हुआ है अगर पिछले कुछ वर्षों पर नजर दौड़ाएं तो करीब १ साल पहले गुजरात की एक कंपनी ने गिल गांव के समीप एक चलते हुए अस्पताल को खरीद लिया था इसी तरह लगभग 2 वर्ष पहले भारतीय कारोपोरेट घराने रिलायंस कंपनी ने लुधियाना की नामी गारमेंट कम्पनी को 3000 करोड़ की ऑफर देते हुए एक्वायर करने की कोशिश की थी यह बात और है की गारमेंट कम्पनी के प्रमोटरों ने ऑफर एक्सेप्ट नहीं किया। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स सैक्टर में कार्यरत बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी को सिंगापुर की विदेशी कंपनी से ऑफर मिला तो उन्होंने अपनी फर्म का एक बड़ा स्टेक बेचते हुए ऑफर को कैश किया जहां तक फुड इंडस्ट्री की बात है ब्रेड बनाने वाली नामी कंपनी को अंतरराष्ट्रीय कंपनी बिम्बो द्वारा खरीदा जा चुका है। निवेशकों का फोकस हेल्थकेयर सेक्टर की ओर परंतु अब बाहरी कंपनियों का सारा ध्यान हेल्थकेयर सेक्टर की ओर मुड़ चुका है क्योंकि हेल्थकेयर सेक्टर में सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा और निजी अस्पतालों के महंगे उपचार के बीच बाहरी कंपनिया एक ऐसा सेटअप बनाना चाहते हैं जिसमें मैं अपनी अस्पतालों की चेन को आगे बढ़ा सके और बाद में मार्केट में इसका आईपीओ लॉन्च किया जा सके हाल ही में लुधियाना के एक अस्पताल को 700 से 1200 करोड़ के बीच में ऑफर मिली है जिसे उसने मान लिया बताया जाता है और इसकी एक किस्त भी ऑफर देने वाली कंपनी से हासिल कर ली है। इसके अलावा कई बड़े अस्पताल भी पंजाब में शिफ्ट हो रहे हैं अथवा नए अस्पतालों का निर्माण किया जा रहा है इसका कारण यह बताया जाता है कि पंजाब में लोगों को तसल्ली बक्श हेल्थ केयर सुविधा नहीं मिलती मरीजों की संख्या को देखते हुए बाहरी जिलों अथवा प्रदेशों के अस्पताल यहां आकर अपनी ओपीडी चलाते हैं और मरीजों को अपने अस्पतालों में उपचार के नाम पर शिफ्ट कर दिया जाता है। युवा पीढ़ी की मुख्य भूमिका बताया जा रहा है की हेल्थकेयर सेक्टर में हुई इस हॉस्पिटल डील में नामी हॉस्पिटल के युवा प्रमोटरों एवं पीढ़ी की मुख्य भूमिका रही जिन्होंने हॉस्पिटल की साख एवं ब्रांडिंग के साथ साथ अच्छी सेवाओं पर फोकस किया। यही नहीं हॉस्पिटल की मेडिकल सेवाओं को अंतराष्ट्रीय स्तर के मापदंड उपलब्ध करवाए। युवा पीढ़ी भली भांति जानती है की अंतर्राष्ट्रीय निवेशक क्वालिटी पैमानों पर कभी कोम्प्रोमाईज़ नहीं करते और वैल्यूएशन बाजार में साख की सबसे बड़ी वैल्यू पड़ती है कैसे अस्पतालों की होती है तलाश हेल्थ केयर में जुटी कॉरपोरेट कंपनियां ऐसी अस्पतालों की तलाश में रहते हैं जो अपने सभी अधिकार उन्हें सौंप दे और उनके निर्देशानुसार मरीज का उपचार करें लुधियाना पटियाला और जालंधर में अस्पतालों की एक खासी श्रृंखला होते हुए भी यह समझ जा रहा कि यहां पर काफी मरीज है जिसके चलते बाहरी अस्पताल यहां आकर अपनी ओपीडी कर रहे हैं। कई मध्यम और बड़े अस्पतालो को ऑफर मिलने का दौर जारी मार्केट में यह ट्रेंड बताया जा रहा है कि काफी संख्या में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां पंजाब के बड़े जिलों को फोकस कर रहे हैं इनमें लुधियाना प्रमुख रूप से शामिल है जिसके चलते दर्जनों अस्पताल हैं जिन्हें कंपनियों द्वारा ऑफर निरंतर मिल रहे हैं देखना यह है कि आने वाले दौर में पंजाब में हेल्थ केयर बिजनेस मैं क्या बदलाव आते हैं क्योंकि अभी तो जो अपने अस्पताल नहीं बेचना चाहते वह भी और जो बेचना चाहते हैं वह कंपनियों की नजर में है