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अजीत झा.चंडीगढ़। पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के 39वें दीक्षांत समारोह में गुरुवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शिरकत की और स्नातक छात्रों को संबोधित किया। इस मौके पर पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक गुलाब चंद कटारिया और नीति आयोग के पूर्व सदस्य विनोद के. पॉल भी मौजूद रहे। अपने संबोधन में नड्डा ने छात्रों को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि यह उनके कठिन परिश्रम, अनुशासन और समर्पण का परिणाम है। उन्होंने पीजीआईएमईआर को उत्तर भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में से एक बताते हुए कहा कि यह संस्थान विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाओं, उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शोध का प्रमुख केंद्र है। नड्डा ने कहा कि दशकों से डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण ने पीजीआई को एक प्रतिष्ठित संस्थान बनाया है। उन्होंने बताया कि संस्थान में इस समय 850 से अधिक एक्स्ट्राम्यूरल और 100 से ज्यादा इंट्राम्यूरल रिसर्च प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं, जो इसकी शोध क्षमता को दर्शाते हैं। उन्होंने पीजीआई की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि यहां एक साथ पैंक्रियास-किडनी ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट और लिवर ट्रांसप्लांट जैसे जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले जहां देश में 387 मेडिकल कॉलेज थे, उनकी संख्या बढ़कर अब 818 हो गई है। इसी तरह एमबीबीएस सीटें 51 हजार से बढ़कर 1.26 लाख से अधिक हो चुकी हैं, जबकि पीजी सीटें 31 हजार से बढ़कर लगभग 81-85 हजार तक पहुंच गई हैं। नड्डा ने कहा कि सरकार अगले पांच वर्षों में 75 हजार नई यूजी और पीजी सीटें जोड़ने का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिनमें से 28 हजार सीटें पिछले दो वर्षों में जोड़ी जा चुकी हैं। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उच्च और पेशेवर शिक्षा एक विशेषाधिकार है, जिस पर सरकार प्रति छात्र प्रति वर्ष 30-35 लाख रुपये तक खर्च करती है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपने पेशे में करुणा और मानवीय संवेदनाओं को बनाए रखें। स्वास्थ्य क्षेत्र के भविष्य पर बात करते हुए नड्डा ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टेम सेल रिसर्च, जीन थेरेपी, प्रिसिजन मेडिसिन और टेलीहेल्थ जैसी तकनीकों की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि तकनीकी प्रगति के बीच मानवीय स्पर्श और संवेदनशीलता को बनाए रखना जरूरी है। अंत में उन्होंने छात्रों को अपने पेशे में उत्कृष्टता हासिल करने