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छत्तबीड़ चिड़ियाघर में बुधवार को उस समय खुशियों का माहौल बन गया, जब सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. बलजीत कौर ने नाजुक परिस्थितियों में रह रहे बच्चों से स्नेहिल मुलाकात की। बच्चों की खिलखिलाहट और उत्साह से पूरा चिड़ियाघर गूंज उठा। मंत्री ने बच्चों के साथ चिड़ियाघर का भ्रमण किया और उनसे आत्मीय बातचीत करते हुए उनकी भावनाओं को जाना। इस दौरान उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर दोपहर का भोजन भी किया, जिससे कार्यक्रम में पारिवारिक माहौल बन गया और बच्चों में अपनापन बढ़ा। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट मुस्कुराहट केवल एक योजना नहीं, बल्कि उन बच्चों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्होंने कोविड-19, बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं में अपने माता-पिता या सहारा खो दिया है। सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी बच्चा अपने सपनों से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि योजना के तहत बच्चों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, आयुष्मान भारत के तहत बीमा, मनोवैज्ञानिक परामर्श और कौशल विकास जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि उन्हें सुरक्षित और सहयोगी माहौल मिल सके। मंत्री ने कहा कि बच्चों को 23 वर्ष की आयु पूरी होने पर 10 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी, जिससे वे आत्मनिर्भर जीवन शुरू कर सकें। इसके अलावा स्कूली शिक्षा के लिए हर साल 20,000 रुपये और वयस्क होने तक 4,000 रुपये प्रति माह स्पॉन्सरशिप भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि योजना को पारदर्शी तरीके से लागू किया जा रहा है, जिसमें जिला प्रशासन द्वारा पहचान, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी द्वारा सत्यापन और डीबीटी के माध्यम से सहायता प्रदान की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार कोविड-19 के कारण 43 बच्चे अनाथ हुए, जबकि 4 बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं, जिन्हें योजना में शामिल किया गया है। इनमें से 42 बच्चों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सहायता और उच्च शिक्षा के अवसर मिल रहे हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जरूरतमंद और अनाथ बच्चे को इस योजना के दायरे में लाया जाए, ताकि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य मिल सके। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज दिया गया सहारा ही कल बच्चों के विश्वास की मजबूत नींव बनता है।