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अशोक सहगल लुधियाना यूटर्न 25 अप्रैल : देश में कुछ दिन पहले बीपी शूगर सहित खतरनाक बीमारियों की दवाइयों के सैंपल फेल होने की चौंकाने वाली बात सामने आई है। दरअसल, सिर दर्द, पेट दर्द, बीपी, शूगर सहित 141 दवाइयों के सैंपल फेल हो गए हैं। सबसे हैरानी की बात ये है कि इनमें से 47 दवाएं हिमाचल प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअम्ब, ऊना और सोलन में बनी है। कौन-कौन सी दवाइयां हुई फेल केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जांच में देश में बनी 141 दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं। यह दवाइयां ज्यादातर सिर दर्द, पेट दर्द, बीपी, शूगर, अल्सर, हृदय रोग जैसी खतरनाक बीमारी व विभिन्न संक्रामक बीमारियों में इस्तेमाल की जाती है। CDSCO के जारी किए ड्रग अलर्ट के अनुसार इन दवाइयों की गुणवत्ती जांच फेल होने पर इन्हें नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) घोषित किया गया है। इसके साथ ही कंपनियों को नोटिस जारी करके दवाइयों का स्टाक वापस मंगवाने के सख्त आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि, हिमाचल से पूरे देश और विदेश में दवाइयां सप्लाई होती है। कौन सी दवाइयां बनती हैं हिमाचल प्रदेश मे पैरासिटामोल 500 मिग्रा टैबलेट प्रीगाबालिन और मिथाइलको-बालामिन कैप्सूल रैबेप्राजोल ग्रैस्ट्रो-रेसिस्टेंट टैबलेट अमोक्षिसिलिन और क्लैवुलेनिक एसिड टैबलेट एसिक्लोफेनाक और पैरासिटामोल टैबलेट लेवोसेटिरीजिन डाइहाइड्रो-क्लोराइड टैबलेट क्लावोसिल-375 टैबलेट डाइक्लोफेनाक पोटैशियम, पैरासिटामोट और क्लोरजाक्साजोन टैबलेट पोविडोन-आयोडीन सॉल्यूशन टेल्मिसार्टन 40 मिग्रा टैबलेट ओन्डैन्सेट्रॉन ओरली डिसइंटीग्रेटिंग टैबलेट 8 मिग्रा पोविडोन आयोडीन और ऑर्निडाजोल मरहम (ऑइंटमेंट) टैक्रोलिमस 0.5 मिग्रा कैप्सूल रैबेप्राजोल सोडियम टैबलेट प्री और प्रोबायोटिक कैप्सूल टैक्रोलिमस 2 मिग्रा कैप्सूल टैक्रोलिमस कैप्सूल IP 1 mg रामिप्रिल टैबलेट IP 2.5 mg डेक्सट्रोमेथॉर्फन, फिनाइलफ्रिन और क्लोरफेनिरामाइन सिरप SML फेरस एस्कॉर्बेट, फोलिक एसिड और जिंक सॉफ्ट जिलेटिन कैप्सूल रैबेप्राइजोल सोडियम इंजेक्शन IP पैंटाप्राजोल ग्रैस्ट्रो-रेजिस्टेंट टैबलेट IP 40 MG मेट्रोनिडाजोल 400 मिग्रा टेबलेट अल्बेंडाजोल टैबलेट IP ओरल रिहाइट्रेशन साल्ट्स IP (ओआरएस) प्रोक्लोरपेराजीन मेलिएट माउथ डिसॉल्विंग टैबलेट क्लॉक्सेस-एसपी टैबलेट एम्ब्रॉक्सोल हाइड्रोक्लोराइड टरब्यूटालिन सल्फेट, ग्वाइफएनेसिन और मेन्थॉल सिरप लुलिकोनाजोल क्रीम कैल्सिड टैबलेट/कैल्शियम और विटामिन डी सप्लीमेंट एटेनोलोल और अम्लोडिपिन टैबलेट स्टेराइल 10 मिलीलीटर इंजेक्शन एनरेक्स खांसी सिरप (कोडीन फॉस्फेट और ट्राइप्रोलिडीन एचसीएल सिरप) सेफिकिसम (एनहाइड्रस) टेबलेट एंटरिक कोटेड रैबेप्राजोल सोडियम और डामपेरिडोन सस्टेन्ड रिलीज कैप्सूल रैबेप्राजोल सोडियम (एंटरिक-कोटेड) और डॉमपेरिडोन (सस्टेन्ड-रिलीज) कैप्सूल डाइक्लोफेनाक सोडियम इंजेक्शन 75 मिग्रा/2 मिलीमीटर ड्रग विभाग ने जारी किया अलर्ट हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं के 47 सैंपल फेल हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इस माह का ड्रग अलर्ट जारी किया है। देश में कुल दवाओं के 141 सैंपल फेल हुए हैं। इसमें हिमाचल की संख्या 47 है। जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं, इनमें कफ सिरप, इंजैक्शन, दिल, मिर्गी, ब्लड प्रैशर और शूगर जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं, वहीं कुछ पाऊडर, आयरन व विटामिन की गोलियां भी गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गईं। सीडीएससीओ के अलर्ट में मेहंदी, टूथपेस्ट, साबुन सहित अन्य कई और उत्पादों के सैंपल भी फेल हुए हैं। सीडीएससीओ के ड्रग अलर्ट के अनुसार हिमाचल के अतिरिक्त उत्तराखंड की 20, गुजरात की 23, पंजाब की 7, राजस्थान की 6, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा की 5-5 दवाएं, तमिलनाडु व महाराष्ट्र की 3-3, केरल, पड्डुचेरी, चेन्नई, जे. एंड के., तेलंगाना के 2-2 दो और यूपी, सिक्किम, झारखंड, दिल्ली, वैस्ट बंगाल, आंध्र प्रदेश और उडीसा का एक-एक दवा का सैंपल फेल हुआ है। राज्य दवा नियंत्रक हिमाचल प्रदेश डा. मनीष कपूर का कहना है कि हिमाचल प्रदेश में बनाई जाने वाली दवाएं उच्च गुणवत्ता की हों, इसी कारण हिमाचल से सैंपल की संख्या बढ़ाई गई है। देशभर में बनने वाली कुल दवाओं में एक तिहाई हिस्सा हिमाचल में तैयार होता है, ऐसे में अन्य राज्यों की तुलना में हिमाचल के सैंपल अधिक फेल नजर आते हैं। हालांकि प्रदेश के जिन दवा उद्योगों में यह दवाएं बनी हुई हैं, उनका उत्पादन बंद करवाया जाता है उनकी सारी जानकारी पब्लिक प्लेटफार्म पर सार्वजनिक की जाती है, ताकि लोग इनका उपयोग न करें। पंजाब में नहीं की जाती गुणवत्ता की परवाह हिमाचल प्रदेश का ड्रग विभाग जहां दवाइयां की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रेगुलर सेंपलिंग पर जोर देता है वहीं पंजाब में ड्रग विभाग सूप्त अवस्था में रहता है एशिया के सबसे बड़ा होलसेल दवा बाजार पिंडी गली मे जांच के नाम पर ड्रग विभाग के अधिकारी कभी कभार ही बाजार में जाते हैं पिंडी गली के अलावा लुधियाना तथा आसपास के क्षेत्र में सैकड़ो दवा की दुकानें हैं परंतु जांच कभी कभार ही की जाती है इसके अलावा जिले में दवाइयां बनाने वाली कई इकाइयां काम कर रही हैं सूत्रों ने बताया कि ड्रग विभाग के अधिकारी बाजार में जाते हैं तो है अथवा दवा बाजार से जुड़े लोग उनके कार्यालय में आते रहते हैं परंतु सैंपलिंग के नाम पर करवाई जीरो ही रहती है क्या राज्य अथवा जिले को लोगों को गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खाने का अधिकार नहीं है ?