पटियाला रोड स्थित वार्ड नंबर-27 के करीब 200 परिवारों के लिए पिछले सात दिन किसी दुस्वप्न से कम नहीं रहे हैं। भीषण गर्मी की शुरुआत के साथ ही इलाके में पेयजल संकट गहरा गया है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को सुबह की चाय से लेकर रोजमर्रा के कामों तक के लिए प्राइवेट टैंकरों पर निर्भर होना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर परिषद की लापरवाही के कारण क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है, लेकिन अधिकारी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।
क्षेत्र के निवासी पवन नेहरू ने बताया कि जलापूर्ति के लिए शिवालिक विहार और गुरदेवा नगर स्थित दो ट्यूबवेलों पर निर्भरता है। पिछले एक सप्ताह से तकनीकी खराबी या खराब प्रबंधन के चलते स्थिति यह है कि मोटर चलने के महज 20 मिनट बाद ही पानी का प्रेशर खत्म हो जाता है। इसके बाद नलों से पानी आना बंद हो जाता है। ऊंचाई वाले घरों में तो हफ्ते भर से एक बाल्टी पानी भी नहीं पहुंचा है।
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जेब पर पड़ रही दोहरी मार
स्थानीय महिला रैनू नेहरू ने बताया कि अभी भीषण गर्मी शुरू भी नहीं हुई है और यह हाल है। रोजाना मोहल्ले में चार-चार पानी के टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। एक ओर नगर परिषद को टैक्स देना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पानी खरीदने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है, जिससे घरेलू बजट बिगड़ गया है।
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शिकायतों पर नहीं जागा प्रशासन, घेराव की तैयारी
नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। कांता देवी, संजय दत्त, कुलभूषण शर्मा, यशपाल सिंह, लाड़ी, अजय तिवारी, निशा देवी, उदयवीर सैनी और निधि सहित अन्य निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में पानी की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तो वे नगर परिषद कार्यालय का घेराव कर चक्का जाम करेंगे।
शहर में बढ़ती आबादी और पुराने ट्यूबवेल ढांचे इस संकट को और गंभीर बना रहे हैं। वार्ड-27 की स्थिति प्रशासन के दावों की पोल खोलती नजर आ रही है।
“सात दिन से पानी की समस्या नहीं है। मैं कर्मचारी भेजकर जांच करवाता हूं। अगर पानी का प्रेशर कम है तो उसे ठीक करवा दिया जाएगा।”
— परविंदर सिंह भट्टी, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद जीरकपुर