Uturn Time
Breaking
शुक्रवार को शहर के कई इलाकों में होगा ब्लैकआउट, 15 मिनट चलेगी मॉक ड्रिल लिव-इन में रह रहे युवक की खून से लथपथ लाश मिली लॉरेंस ऑफ पंजाब सीरीज का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सांसद वड़िंग ने दायर की याचिका, डॉक्यूमेंट्री पर जताया ऐतराज मुख्यमंत्री द्वारा निवेश को प्रोत्साहित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयास जारी विजिलेंस ब्यूरो द्वारा 30,000 रुपये रिश्वत लेते इंस्पेक्टर को रंगे हाथों गिरफ्तार वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा कर्मचारी यूनियनों के साथ बैठकें, उचित मांगों पर जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा सरहद पार से नशीले पदार्थों की तस्करी वाले कार्टेलों से संबंधित पांच व्यक्ति 7 किलो हेरोइन समेत अमृतसर से गिरफ्तार एस.सी. आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी द्वारा भलाई विभाग की रोस्टर चेकिंग टीम तलब ‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी की घटनाएं 69 प्रतिशत घटीं गैंगस्टरां ते वार का 91वां दिन: पंजाब पुलिस द्वारा 561 स्थानों पर छापेमारी; 281 गिरफ्तार भगवंत मान सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ग्रुप-डी कर्मचारियों को गेहूं हेतु ब्याज मुक्त ऋण देकर आवश्यक जरूरतों के लिए समय पर सहायता सुनिश्चित की गई: हरपाल सिंह चीमा कूरियर कंपनी के ऑफिस से सवा 2 लाख कैश और लॉकर चोरी
Logo
Uturn Time
पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए बेअदबी कानून को लेकर विवाद गहराता जा रहा है और यह मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। जालंधर निवासी सिमरनजीत सिंह ने इस कानून को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिसमें उन्होंने तर्क दिया है कि यह कानून संविधान के धर्मनिरपेक्ष ढांचे के खिलाफ है और केवल एक धर्म विशेष से जुड़ा होने के कारण असंवैधानिक प्रतीत होता है। साथ ही उन्होंने संविधान की धारा 254 का हवाला देते हुए कहा कि जब राज्य का कानून केंद्र के कानून से टकराता है, तो उसे लागू करने से पहले राष्ट्रपति की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया। याची ने यह भी सवाल उठाया है कि पंजाब सरकार ने राज्यपाल की मंजूरी लेकर 20 अप्रैल 2026 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जबकि इसमें शामिल प्रावधान बेहद कठोर हैं, जिनमें बेअदबी साबित होने पर 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और 5 लाख से 25 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान शामिल है। कानून में यह भी कहा गया है कि हर वह व्यक्ति “कस्टोडियन” माना जाएगा जिसके पास श्री गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप है और बेअदबी की स्थिति में उसे तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी। इसके अलावा जांच प्रक्रिया को भी सख्त बनाया गया है, जिसमें DSP रैंक से नीचे अधिकारी जांच नहीं कर सकेगा, 60 से 90 दिनों में चार्जशीट दाखिल करनी होगी और डिजिटल सबूतों जैसे CCTV, सोशल मीडिया, कॉल रिकॉर्ड और अन्य फॉरेंसिक जांच को भी शामिल किया जाएगा। याची ने इन सभी प्रावधानों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है और खुद इस मामले की पैरवी करने की बात कही है, जिससे यह मामला अब कानूनी और संवैधानिक बहस का बड़ा विषय बन गया है।