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भाग्यवान भवन का निर्माण करता है सौभाग्यवान वास्तु के अनुरूप भवन का निर्माण करवाता है और जिसका भाग्य साथ नहीं देता है वो व्यक्ति भवन निर्माण में अनेक त्रुटियां कर बैठता है,वही त्रुटियां उसके विनाश का कारक भी बन जाती है ऐसा मानना है अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वास्तुविद एवं लेखक डॉ भूपेन्द्र वास्तुशास्त्री का ।भवन में अगर ईशान कोण दूषित तो स्वास्थ्य के साथ शिक्षा का वहम ,पूर्व दूषित तो सरकार से भय,आग्नेय कोण के वास्तु दोष उधारी डुबाने का भय,दक्षिण नेम फेम की कमी का भय पश्चिम के दोष अकारण चिंता,नफा नुक़सान का वहम वायव्य दूषित तो शत्रु भय उतर दूषित तो नए आयाम को कैसे स्थापित करें और अवसरों को कैसे भुनाए इस बात का भय इन सभी दोषों में नेरीत्य कोण दूषित है तो वहम की शब्दो में बांध नही सकते यथा कही मुझे पुलिस पकड़ लेगी।कहीं मैं गंभीर बीमारी की चपेट में तो नहीं आ गया ।कहीं मेरा व्यापार तो चौपट नहीं हो जायेगा।कहीं मेरे उपर ऊपरी हवा का दोष तो नहीं।कहीं मेरी ईकाई की दिशा तो गलत नहीं।कहीं कुछ अनहोनी तो नहीं होगी।किसी ने घर पर राई तो नहीं फेंक दी।कहीं मेरे घर पर प्रेत बाधा तो नहीं ।कहीं मेरी कुंडली में दोष तो नहीं।इस प्रकार के अनगिनत वहम दिलों दिमाग़ में रहते हैं और व्यक्ति का जीवन नारकीय बन जाता है ।