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पीड़ित परिवारों का बांटा दुख, तीनों सरकारों से की 50-50 लाख रुपये मुआवजे की मांग

शाही इमाम ने कहा- लाइफ जैकेट होती तो बच सकती थीं कई जानें, प्रशासन की बड़ी लापरवाही।

दुख की इस घड़ी में मुस्लिम समाज पूरी तरह से पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है

मुआवजे की मांग: केवल 2 लाख काफी नहीं, केंद्र, यूपी और पंजाब सरकार मिलकर दें 50-50 लाख का मुआवजा
-चरणजीत सिंह चन्न- जगरांव/यूटर्न/12/अप्रैल। उत्तर प्रदेश के वृंदावन नाव हादसे में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के शोक संतप्त परिवारों के साथ संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए आज शाही इमाम पंजाब, मौलाना मुहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी विशेष रूप से जगरांव पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उनका दुख बांटा और स्पष्ट किया कि इस कठिन समय में पूरा मुस्लिम भाईचारा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। प्रशासन की घोर लापरवाही का परिणाम है यह हादसा मीडिया से बातचीत करते हुए शाही इमाम लुधियानवी ने कहा कि यह हादसा टाला जा सकता था। पीड़ित परिवारों से बातचीत के बाद यह साफ हो गया है कि यह दुर्घटना सुरक्षा प्रबंधों की भारी कमी के कारण हुई है। इसके लिए वहां के डिप्टी कमिश्नर और संबंधित नहरी विभाग पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, "यह प्रशासन की बहुत बड़ी अनदेखी है कि श्रद्धालुओं को लाइफ जैकेट नहीं पहनाई गई। अगर उन्हें लाइफ जैकेट दी गई होती, तो पानी के नीचे कीचड़ (गारे) में फंसकर जान गंवाने वाले कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती थी।" भविष्य के लिए चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों ताकि ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। 2 लाख नाकाफी, तीनों सरकारें दें 50-50 लाख का मुआवजा शाही इमाम ने कहा कि जो लोग दुनिया से चले गए, उन्हें वापस तो नहीं लाया जा सकता, लेकिन उनके पीछे रह गए परिवारों की आर्थिक सुरक्षा बेहद जरूरी है। इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और पंजाब सरकार— तीनों की सीधी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने सरकारों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, "इतने बड़े दुख के बाद व्यापार को दोबारा सेटल करना या परिवार को संभालना एक बहुत बड़ी चुनौती है। ऐसे में केंद्र सरकार का सिर्फ 2 लाख रुपये देने की बात कहना और यूपी व पंजाब सरकार का चुप रहना निराशाजनक है। कई परिवार इस हादसे में बिल्कुल खाली हो गए हैं और उनके पीछे छोटे बच्चे हैं। मैं समझता हूं कि तीनों सरकारों को प्रत्येक मृतक के परिवार को कम से कम 50-50 लाख रुपये का मुआवजा देना चाहिए, ताकि वे आर्थिक रूप से स्थिर रह सकें।" अंत में शाही इमाम ने जगरांव शहर की एकता की मिसाल देते हुए कहा कि यहाँ के निवासियों ने हमेशा एक-दूसरे के दुख में साथ दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मुस्लिम समाज पीड़ित परिवारों की हर संभव मदद करने के लिए तत्पर है। सांत्वना देने पहुंचे शाही इमाम को मिली बेरुखी, आधे घंटे तक मौहल्ले में खड़े करते रहे इंतजार:-एक ओर जहां शाही इमाम पंजाब शहर में भाईचारे और संवेदना का संदेश लेकर पहुंचे थे, वहीं उन्हें एक घर के बाहर अजीबोगरीब बेरुखी का सामना करना पड़ा। जानकारी के अनुसार, जब शाही इमाम लुधियानवी जगरांव की गीता कॉलोनी स्थित पीड़ित परिवार' के घर अपना शोक व्यक्त करने पहुंचे, तो पारिवारिक सदस्यों द्वारा बताया गया कि अंदर पाठ चल रहा है और उन्हें कुछ समय इंतजार करना होगा। मानवता और संवेदना के नाते शाही इमाम और उनके साथी लगभग आधे घंटे से अधिक समय तक गली में ही खड़े होकर इंतजार करते रहे। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान किसी भी पारिवारिक सदस्य या मोहल्लेवासी ने उन्हें बैठने तक के लिए नहीं पूछा। काफी लंबा समय बीत जाने के बाद, जब शाही इमाम यह कहकर वहां से वापस लौटने लगे कि 'वे पहले अन्य पीड़ित परिवारों से मिल आते हैं, फिर लौटकर आएंगे', तब जाकर एक मोहल्लेवासी ने औपचारिकता निभाते हुए कहा कि वे उनके घर के अंदर बैठकर इंतजार कर लें। हालांकि, तब तक शाही इमाम अन्य पीड़ित परिवारों से मिलने के लिए वहां से जा चुके थे। दुख की घड़ी में सांत्वना देने आए एक धार्मिक गुरु के साथ हुए इस व्यवहार की शहर में चर्चा हो रही है।