चंडीगढ़/यूटर्न/28 अप्रैल। आम आदमी पार्टी (आप) के सात राज्यसभा सांसदों, जिनमें से छह पंजाब से हैं, के हालिया पलायन से पार्टी को आर्थिक झटका लगने की आशंका है, लेकिन राज्य में उसकी राजनीतिक स्थिति पर इसका बड़ा असर पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है। इन हाई-प्रोफाइल नेताओं के बाहर जाने से पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रहे मतभेद सामने आ गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से भारतीय जनता पार्टी को संसद के ऊपरी सदन में मजबूती मिल सकती है।
आर्थिक मोर्चे पर दबाव
राजिंदर गुप्ता, अशोक मित्तल और विक्रमजीत सिंह साहनी जैसे उद्योगपतियों के पार्टी छोड़ने से आप की फंडिंग क्षमता पर असर पड़ सकता है। ये नेता पार्टी के लिए आर्थिक संसाधनों के अहम स्रोत माने जाते थे। उनके जाने से आप के वित्तीय नेटवर्क पर दबाव बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ संख्यात्मक नहीं बल्कि रणनीतिक नुकसान भी है, क्योंकि इससे पार्टी की फंड जुटाने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
राजनीतिक पकड़ बरकरार
हालांकि, राजनीतिक स्तर पर आप की स्थिति फिलहाल मजबूत दिख रही है। 2022 में सरकार बनाने के बाद पार्टी ने पंजाब में अपना जनाधार बनाए रखा है और उपचुनावों तथा स्थानीय निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया है। विश्लेषकों के मुताबिक, खासकर ग्रामीण पंजाब में आप की पकड़ मजबूत बनी हुई है। हाल ही में लाए गए एंटी-सेक्रिलेज (धार्मिक अपमान विरोधी) कानून ने भी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने में मदद की है।
चुनावी असर सीमित
माना जा रहा है कि यह पलायन गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में आप के लिए ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है, जहां पार्टी फंडिंग के लिए केंद्रीकृत संसाधनों पर ज्यादा निर्भर है। वहीं पंजाब में छोटे दानदाताओं और एनआरआई समुदाय से मिलने वाला समर्थन पार्टी के लिए सहारा बना रह सकता है।
आगे की चुनौतियां
इसके बावजूद, विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर आप पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। पार्टी के अंदरूनी हालात और नेतृत्व पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह भी आशंका जताई जा रही है कि आगे और असंतोष सामने आ सकता है। फिलहाल, राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि आप को आर्थिक मोर्चे पर दबाव का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन पंजाब में उसकी राजनीतिक जमीन निकट भविष्य में सुरक्षित नजर आती है।
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