चंडीगढ़ : चंडीगढ़ नगर निगम हाउस की बैठक शुरू होते ही बुधवार को तीखा हंगामा देखने को मिला। बैठक में सेक्टर-45 में चल रही तोड़फोड़ कार्रवाई का मुद्दा छा गया, जिसे लेकर पार्षदों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बन गई।
कांग्रेस पार्षदों ने सबसे पहले हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं और आम जनता परेशान है। पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने कहा कि उनके क्षेत्र में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और इस मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रशासन बड़े अवैध कब्जों पर कार्रवाई क्यों नहीं करता।
हंगामे के बीच मेयर सौरभ जोशी खुद धरने पर बैठ गए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई नहीं रोकी जाती, वे अपने स्थान से नहीं हटेंगे। मेयर ने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर सभी दल एकजुट हैं और इसके लिए ऑल पार्टी कमेटी का गठन किया गया है।
बैठक के दौरान पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला को लेकर भी विवाद हुआ। कुछ पार्षदों द्वारा की गई टिप्पणी पर मेयर और पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई। मेयर ने चेतावनी दी कि किसी भी पार्षद के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इसी दौरान वेंडरों से वसूली जाने वाली फीस का मुद्दा भी गरमा गया। कांग्रेस पार्षदों ने दावा किया कि शहर में करीब 25 हजार वेंडर हैं, लेकिन केवल 4 हजार ही निगम को शुल्क दे रहे हैं, जिससे राजस्व पर असर पड़ रहा है।
बैठक में पार्किंग पास को लेकर राहत का प्रस्ताव भी सामने आया। प्रस्ताव के अनुसार चारपहिया वाहनों के वार्षिक पास में 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जिससे 6000 रुपये का पास घटकर 5400 रुपये हो जाएगा। वहीं, दोपहिया वाहनों का पास 3000 रुपये से घटकर 2700 रुपये किया जा सकता है।
बैठक के दौरान लगातार हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा अधूरी ही रह गई।