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पानीपत/ यूटर्न/ 8 अप्रैल। पानीपत रिफाइनरी के ठेका पर काम करने वाले निर्माण मजदूरों की तरह ही अब गुड़गांव-मानेसर औद्योगिक क्षेत्र में गैस की भारी कीमत वृद्धि, कंपनी मालिकों द्वारा ओवरटाइम का दोगुना भुगतान न करना, ठेका श्रमिकों को कानूनी अधिकारों से वंचित रखना तथा मजदूरी बढ़ोतरी जैसी बुनियादी मांगों को लगातार नजरअंदाज करने के खिलाफ ठेका मजदूरों का स्वतःस्फूर्त आंदोलन पिछले कई दिनों से उभर रहा है। पानीपत की तरह ही इस न्यायसंगत आंदोलन पर भी हरियाणा पुलिस और प्रशासन द्वारा किया गया दमन बेहद निंदनीय है। मानेसर के औद्योगिक क्षेत्र में ठेका मजदूरों के आंदोलन लगातार फूट रहे हैं। 2 अप्रैल को होंडा के ठेका मजदूरों ने वेतन बढ़ोतरी को लेकर आंदोलन शुरू किया। 3 अप्रैल को श्रम विभाग और पुलिस प्रशासन की मध्यस्थता में एक समझौता कराया गया, लेकिन इसके बाद भी मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। 4 अप्रैल को मुंजाल शोवा और सत्यम फैक्ट्री के मजदूर वेतन वृद्धि की मांग को लेकर आंदोलन में उतर आए। 6 अप्रैल को रूप पोलिमर और अन्य फैक्ट्रियों के मजदूरों ने काम बंद कर हड़ताल शुरू कर दी। 7 अप्रैल को गारमेंट क्षेत्र की फैक्ट्रियों—रिचिको (Richico) और मॉडलामा—के मजदूर भी वेतन वृद्धि और अन्य कानूनी मांगों को लेकर हड़ताल पर उतर आए और मानेसर तहसील में धरना देने लगे। इस दिन मानेसर तहसील में मुंजाल, सत्यम, रूप पोलिमर और रिचिको फैक्ट्री के मजदूर एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए धरने पर बैठे थे। आईएमटी मानेसर सेक्टर-5 की सड़कें मजदूरों से भर गईं, विशेषकर लेबर चौक तक का इलाका पूरी तरह आंदोलित मजदूरों से भरा रहा। दिन भर मजदूर प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच वार्ता चलती रही, लेकिन देर शाम प्रशासन ने मजदूर नेताओं को डराने-धमकाने और जबरन समझौता थोपने की कोशिश की। मजदूरों को यह कहकर तितर-बितर किया गया कि समझौता हो गया है और लिखित रूप में कंपनी में दिया जाएगा, जबकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन मांगों पर समझौता हुआ है। इसके बाद पुलिस दमन का खुला रूप सामने आया। देर रात मानेसर तहसील के पार्क में इकट्ठा मजदूरों को पहले झूठे आश्वासन देकर हटाया गया, फिर बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ा गया। इसके साथ ही मुंजाल शोवा के मजदूर प्रतिनिधि आकाश और इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ता राजू, हरीश और विकास तथा ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री काॅंट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन के सनी और सार्थक को धरनास्थल से गिरफ्तार कर लिया गया। इन्कलाबी मजदूर केंद्र के श्यामबीर और अजीत को उनके कमरों से उठाकर ले जाया गया। पुलिस ने इन साथियों के फोन बंद कर दिए और उन्हें थाने में रखकर मनमानी अनुबंध भरवाने का दबाव बनाया। गंभीर बात यह है कि प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन मजदूरों के इस स्वतःस्फूर्त आंदोलन को बदनाम करने के लिए “बाहरी लोगों द्वारा भड़काने” का झूठा आरोप लगा रहे हैं। वास्तव में “बाहरी तत्वों” का बहाना बनाकर पुलिस-प्रशासन उन श्रमिक संगठनों और कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहा है, जो मजदूरों के पक्ष में खड़े होकर उनके अधिकारों की आवाज उठा रहे हैं। गुड़गांव पुलिस ने भारी दबाव और प्रतिरोध के चलते देर रात लगभग 1:00 बजे गिरफ्तार साथियों को थाने से छोड़ा, लेकिन यह रिहाई भी मजदूरों पर दबाव बनाकर, मनमाने कागजों पर हस्ताक्षर करवाकर की गई। यह पूरी कार्रवाई श्रमिक आंदोलन को तोड़ने, मजदूरों में डर पैदा करने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने का सुनियोजित प्रयास है। जन संघर्ष मंच हरियाणा इस दमनकारी कार्रवाई की तीव्र निंदा करता है और मांग करता है कि: 1. मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं पर की गई सभी दमनात्मक कार्रवाइयों को वापस लिया जाए। 2. जबरन भरवाए गए अनुबंधों को रद्द किया जाए। 3. मजदूरों की सभी न्यायसंगत मांगों—वेतन वृद्धि, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, और श्रम कानूनों के पालन—को तुरंत लागू किया जाए। 4. मजदूर आंदोलनों का समर्थन करने वाले मजदूर संगठनों के नेताओं को “बाहरी तत्व” बताकर बदनाम करने की साजिश बंद की जाए। मजदूरों का यह आंदोलन रोटी, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है। इस पर किया गया हर दमन मजदूरों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।