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पानीपत/यूटर्न/4 अप्रैल। हरियाणा के कारागार महानिदेशक आलोक मितल के निर्देशानुसार पानीपत जेल में कैदियों व बंदियों के जीवन में शिक्षा और तकनीकि प्रशिक्षण के माध्यम से सामाजिक सुधार लाने की अनूठी पहल की जा रही है ताकि बंदी जेल से बाहर जाकर अपना कोई काम कर सके, किसी पर निर्भर न रहे और सम्मानजनक जीवन जी सके। जेल में बंद निरक्षर बंदी भी अब शिक्षा ग्रहण कर रहे है और पढे लिखे बंदी उच्च शिक्षा की तरफ अग्रसर हो रहे है। जेल अधिकारियों के प्रयासों से बंदियों का शिक्षा की तरफ रूझान बढ रहा है। जेल अधिकारियों अनुसार भारत सरकार की उल्लास योजना के तहत अभी तक जेल के 40 निरक्षर बंदियों का एनरोलमेंट हो चुका है और बाकि की कागजात संबंधित जानकारी पूरी होने पर पंजीकरण होगा। बता दे कि केंद्र सरकार की उल्लास योजना के तहत 15 वर्ष से उपर के निरक्षर लोगों को पढाया जाता है, जोकि किसी वजह से स्कूल जाने से वंचित रह गये। वहीं जो बंदी कुछ कक्षाओं तक पढे लिखे है, उनको नेशनल इंस्टीच्यूट ऑपन स्कूल (एनआईओएस) द्वारा 10वीं व 12वीं करवाई जा रही है। ओपन स्कूल में 10वीं कक्षा के लिये 73 और 12वीं कक्षा के लिये 29 बंदियों ने पंजीकरण करवाया है। शिक्षित बंदी ही इन 10वीं व 12वीं कक्षा वाले बंदियों को पढा रहे है। जबकि 12वीं कक्षा पास बंदी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) से ग्रेजुएशन कर रहे है। इनमें 24 बंदियों ने बीए और 6 बंदियों ने बीकॉम के लिये एनरोलमेंट करवाया है। इसके अलावा इंडियन विजिन फाउंडेशन (एनजीओ) द्वारा 30 बंदियों को कंप्यूटर का तीन माह का बेसिक कोर्स करवाया जा रहा है। पानीपत आईटीआई के सहयोग से पानीपत जेल में बंदियों के तकनीकि कौशल विकास के लिये आईटीआई के एक साल के सिलाई और कारपेंटर के कोर्स चल रहे है। इस योजना की जिम्मेदारी जेल उप अधीक्षक नवीन छिल्लर को दी गई है। बाक्स डीजी जेल आलोक मितल के निर्देशानुसार चल रही बंदियों के कल्याण की योजना- संजीव कुमार जेल अधीक्षक संजीव कुमार ने बताया कि डीजी जेल आलोक मितल के निर्देशानुसार पानीपत जेल में बंदियों के कल्याण के लिये यह योजना चल रही है। जेल में बंदियों को शिक्षित करना और रोजगारपरक तकनीकि शिक्षा केवल प्रशिक्षण तक ही सीमित नहीं है, यह बंदियों के जीवन में एक साकारात्मक तरीके से सामाजिक सुधार लाने का प्रयास है। कौशल प्रशिक्षण लेकर बंदी जेल से बाहर जाने पर अपना कोई न कोई काम कर सकेंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे।