हरियाणा/यूटर्न/3 अप्रैल। सीनियर मेडिकल ऑफिसर एवं एडमिनिस्ट्रेटर डॉ आशीष अनेजा ने बताया कि प्रत्येक मौसम के अपने फायदे और नुकसान होते हैं, साथ ही साथ उनसे जुड़ी विशिष्ट बीमारियां भी होती हैं। मौसम बदलने के साथ ही बीमार पड़ने की हमारी प्रवृत्ति भी बदल जाती है। सर्दी-जुकाम, फ्लू, नाक बहना, गले में खराश और अन्य बीमारियाँ मौसमी बदलावों के दौरान सबसे आम हैं, हमें सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसी जीवनशैली अपनानी चाहिए जिससे हम बिना बीमार हुए किसी भी मौसम का सामना करने में सक्षम हों । बदलते मौसम में सर्दी, खांसी, फ्लू और संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है। इससे बचने के लिए अपनी इम्यूनिटी मजबूत रखें, ताजा गर्म भोजन करें, और पानी उबाल कर पिएं। व्यक्तिगत स्वच्छता (हाथ धोना, मास्क पहनना) बनाए रखें और अचानक तापमान बदलने (जैसे AC से तुरंत धूप में जाना) से बचें।
डॉ. अनेजा ने बताया कि बदलते मौसम में सावधानियां रखे जैसे कि खान-पान में बदलाव, गर्म पानी पिएं और अदरक, हल्दी, शहद का सेवन करें, बाहर के स्ट्रीट फूड से बचें और ताजे फल-सब्जियां खाएं। हाथ नियमित रूप से धोएं और बाहर से आने पर सैनिटाइजर का उपयोग करें। मच्छरों से बचाव और कूलर और गमलों में पानी न जमा होने दें, मच्छरदानी या क्रीम का प्रयोग करें। अपनी दिनचर्या में 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें और हल्की एक्सरसाइज करें और बारिश में भीगने से बचें ।अपने दिन की शुरुआत और अंत पर्याप्त मात्रा में पानी, तरल पदार्थ या पेय पदार्थों के साथ करें। सुबह आप एक चम्मच शहद मिलाकर नींबू पानी पी सकते हैं, जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए प्रतिदिन कम से कम दो से तीन लीटर पानी पीना चाहिए। जैसा कि कहावत है, 'आप जो खाते हैं वही बनते हैं।' स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक भोजन आवश्यक है। पर्याप्त पोषक तत्व प्राप्त करने के लिए मौसमी फलों और सब्जियों को अपने दैनिक आहार में शामिल करें। मौसम परिवर्तन के दौरान पैकेटबंद और तले हुए खाद्य पदार्थों से परहेज करें। चुस्त और सक्रिय रहने के लिए प्रोटीन युक्त भोजन, उबली हुई सब्जियां और जैविक फल खाना बेहतर है।