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आवारा कुत्तों पर नियंत्रण का प्रोजेक्ट विवादों में, नगर परिषद और संस्था आमने-सामने - Uturn Time
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जीरकपुर/यूटर्न/2अप्रैल।शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया गया एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) प्रोग्राम प्रशासनिक असमंजस और आपसी तालमेल की कमी के चलते विवादों में घिर गया है। नगर परिषद जीरकपुर और कावा संस्था के बीच पत्राचार से यह स्पष्ट हुआ है कि प्रोजेक्ट को शुरू करने को लेकर दोनों पक्षों में गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए हैं। जानकारी के अनुसार, नगर परिषद ने कावा को डॉग स्टरलाइजेशन प्रोजेक्ट का कार्यादेश जारी किया था, जिसके बाद संस्था ने नियमों के तहत एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया से मान्यता के लिए आवेदन किया। एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम 2023 के अनुसार, ऐसे किसी भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले बोर्ड की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। कावा का कहना है कि नगर परिषद द्वारा उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद ही कार्य शुरू किया जाए। इसी कारण सभी तैयारियां पूरी होने के बावजूद प्रोजेक्ट को शुरू नहीं किया गया। हालांकि बाद में नगर परिषद ने एक मेमो जारी कर संस्था पर कार्य शुरू न करने का आरोप लगाते हुए तीन दिनों के भीतर काम शुरू करने का नोटिस दे दिया, जिससे विवाद और गहरा गया। संस्था ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा है कि उन्होंने हर कदम नगर परिषद के निर्देशों के अनुसार उठाया है और देरी उनकी ओर से नहीं, बल्कि बोर्ड की निरीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया के कारण हुई है, जो उनके नियंत्रण से बाहर है। कावा ने नगर परिषद के समक्ष यह भी प्रश्न उठाया है कि क्या बिना अंतिम मंजूरी के प्रोजेक्ट शुरू किया जाए या नियमों के अनुसार स्वीकृति मिलने के बाद ही कार्य प्रारंभ किया जाए। साथ ही संस्था ने मांग की है कि मंजूरी मिलने तक की अवधि को अनुबंध की समय-सीमा में शामिल न किया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि एबीसी प्रोग्राम शहर में आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने और मानव-जानवर संघर्ष को कम करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में प्रशासनिक अस्पष्टता के कारण इस प्रोजेक्ट का अटकना सीधे तौर पर आम लोगों को प्रभावित कर सकता है बॉक्स पहले भी सफल रहा है प्रोजेक्ट कावा ने बताया कि वर्ष 2024 से जुलाई 2025 तक वह जीरकपुर में एबीसी प्रोग्राम का सफल संचालन कर चुकी है। इस बार देरी केवल प्रक्रियात्मक कारणों से हो रही है। कोटस “हमारी ओर से किसी प्रकार की देरी नहीं है। हम किसी भी गैरकानूनी कार्य को प्राथमिकता नहीं देंगे और कानून के दायरे में रहकर ही काम करेंगे। कावा को आवश्यक एनओसी या दस्तावेजों के लिए कहीं नहीं रोका गया है। यदि संस्था एक सप्ताह के भीतर कार्य शुरू नहीं करती, तो टेंडर रद्द कर दिया जाएगा।”