चंडीगढ़/यूटर्न/1 अप्रैल। नगर निगम की 30 मार्च को हुई फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी (एफ एंड सीसी) की बैठक में उस वक्त तीखी बहस छिड़ गई जब पार्षद जसबीर सिंह बंटी ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप जड़ दिए। बैठक का माहौल आरोप-प्रत्यारोप के बीच गर्म रहा।
पार्षद बंटी ने कहा कि रोड डिवीजन नंबर-1 के तीन कर्मचारियों को बिना ठोस कारण के डिवीजन नंबर-2 में शिफ्ट कर दिया गया, जिससे उनके वार्ड में चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने इसे प्रशासनिक मनमानी करार दिया।
उन्होंने आरोप लगाया कि जसप्रीत सिंह (एमटीएस) को संबंधित अधिकारी निजी कार्यों में इस्तेमाल कर रहे हैं। बंटी के अनुसार, एसडीओ उन्हें अपने साथ ले जाकर गाड़ी चलवाने जैसे निजी काम करवा रहे हैं, जो नियमों का उल्लंघन है।
बैठक में चरणप्रीत सिंह के कार्यक्षेत्र को लेकर भी सवाल उठे। पार्षद ने बताया कि उनकी ड्यूटी आर-6 क्षेत्र में थी, लेकिन वे आर-10 में काम कर रहे थे। इस पर अधिकारियों ने स्वीकार किया कि वह वहां “अनधिकृत रूप से” कार्य कर रहे थे, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इसके पीछे किसका आदेश था।
इस दौरान एक अधिकारी के बयान कर्मचारियों को जहां चाहें तैनात कर सकते हैं ना विवाद को और बढ़ा दिया। पार्षद बंटी ने इसे जवाबदेही की कमी और नियमों की अनदेखी बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के ट्रांसफर के बाद उनके वार्ड में कई जरूरी काम अटक गए हैं, जिससे लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पार्षद ने मेयर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही यह भी सवाल उठाया कि बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू होने के बावजूद इस तरह की अनियमितताएं कैसे हो रही हैं।
अंत में बंटी ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।