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शहर की प्रमुख सड़कों की हालत लगातार खराब होती जा रही है और अब यह समस्या लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। जगह-जगह गहरे खड्डे, उखड़ी हुई सड़कें और अधूरा पड़ा मरम्मत कार्य वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को झेलनी पड़ रही है, जो आए दिन फिसलकर हादसों का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस गंभीर समस्या की ओर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। करीब 20 दिन पहले सड़क मरम्मत का कार्य शुरू किया गया था, जिससे लोगों को राहत की उम्मीद जगी थी। शुरुआती दिनों में मशीनें और मजदूर काम करते नजर आए, लेकिन कुछ ही समय बाद कार्य अचानक बंद कर दिया गया। अब हालात यह हैं कि सड़कें पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो चुकी हैं। कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है, जिससे गहरे खड्डे बन गए हैं। इन खड्डों में बारिश का पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है, जो दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहा है। खासकर रात के समय और तेज रफ्तार में वाहन चलाने वालों के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक साबित हो रही है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह समस्या सबसे ज्यादा गंभीर बनी हुई है। फिसलन भरी सड़कों के कारण बाइक और स्कूटर सवार संतुलन खो रहे हैं और गिरकर घायल हो रहे हैं। कई लोग चोटिल हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। कोटस “हैरानी की बात है कि जब सड़क मरम्मत का काम शुरू किया गया था तो उसे बीच में ही क्यों छोड़ दिया गया। मेरी दुकान के सामने आए दिन दोपहिया वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं।” निशु नंदा, स्थानीय दुकानदार प्रशासन का सड़कों की हालत की तरफ कोई ध्यान नहीं है। काम शुरू किया और बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया।