गुस्ताख़ी माफ़ 3.1.2026
मोहाली से प्रेम यह, अच्छा है श्रीमान।
हलवारे पर भी ज़रा, दे देते कुछ ध्यान।
दे देते कुछ ध्यान, रवैया छोड़ें टालू।
यहां उड़ानें उड़ें, इसे करवायें चालू।
कह साहिल कविराय, रहेगा कब तक खाली।
हलवारा भी चले, चल रहा ज्यों मोहाली।
प्रस्तुति -- डॉ. राजेन्द्र साहिल