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पंजाब में वेरका के GM समेत 3 अधिकारी सस्पेंड सेना को भेजे दूध पाउडर के सैंपल हुए फेल - Uturn Time
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अशोक सहगल लुधियाना 27 मार्च,यूटर्न : पंजाब राज्य के प्रसिद्ध वेरका ब्रांड के दूध पाउडर के सैंपल फेल होने के बाद 3 अधिकारियों पर गाज गिरी है। सरकार ने लुधियाना मिल्क प्लांट के जीएम दलजीत सिंह क्वालिटी मैनेजर गुरइकबाल सिंह सिंह तथा प्रोडक्शन मैनेजर परितोष मिश्रा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है यह आदेश शुक्रवार को मिल्कफेड के एमडी राहुल गुप्ता ने जारी किया। प्राप्त जानकारी के अनुसार मिल्क प्लांट लुधियाना की और से इंडियन आर्मी को सूखे दूध पाउडर की 2 खेप भेजी गई थी जिनमें एक 58.338 मीट्रिक टन तथा दूसरी 66.654 मीट्रिक टन थी। लेकिन मिल्क प्लांट लुधियाना की और से भेजी गई सूखे दूध पाउडर की दोनों खेप के नमूने फेल हो गए जिसकी वजह से इंडियन आर्मी द्वारा सूखे दूध पाउडर को रिजेक्ट कर दिया। इन सैंपलों में बाहरी कण पाए गए। इसके बाद करीब 125 मीट्रिक टन की खेप को क्वालिटी मानकों पर खरा न उतरने के कारण रिजेक्ट कर दिया गया सेना की ओर से जारी नोटिस में कहा गया कि 7 दिनों के भीतर अपने स्टॉक को हमारे कार्यालय से ले जाएं। यदि तय समय में अगर वेयर का मिल्क प्लांट नहीं अपना स्टॉक नहीं उठाया तो अधिकारियों की कमेटी द्वारा नष्ट कर दिया जाएगा और इसके बाद कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। विपक्ष ने इसे लेकर सख्त कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई। विवाद बढ़ने पर विभाग ने फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की है। पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह ने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी सैंपलों की जांच की जा सकती है सेना की ओर से भेजा गया नोटिस लुधियाना जिला कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन को भेजे गए एक नोटिस में आर्मी सर्विस कोर यूनिट के ऑफिसर कमांडिंग ने बताया कि वेरका की लुधियाना यूनिट द्वारा सप्लाई किया गया लगभग 125 मीट्रिक टन होल मिल्क पाउडर रिजेक्ट किया जा रहा है। पत्र में बताया कि मिल्क पाउडर के दो बैच - एक 58.338 टन का और दूसरा 66.654 टन का रिजेक्ट कर दिए गए। रद्द करने के पीछे कारण क्वालिटी से जुड़ा होना बताया गया है। इस पत्र की कॉपी केंद्रीय रक्षा मंत्रालय में परचेज और फूड इंस्पेक्शन ऑर्गनाइजेशन के चीफ डायरेक्टर को भी भेजी गई है। अगर स्वास्थ्य विभाग करता रूटीन में जांच तो क्वॉलिटी मेंटेन हो सकती थी अगर स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर वेरका के दूध व दूध से बने उत्पादों की जांच करता रहता तो इसकी क्वॉलिटी मेंटेन हो सकती थी हालांकि वेरका द्वारा भी अपने सैंपलों की रोज जांच करने का दावा किया जाता है परंतु अगर ऐसा होता तो स्थिति आज इतनी गंभीर न होती उल्लेखनीय है कि पंजाब में वेरका द्वारा बेचा जा रहा दूध और दूध से बने उत्पाद घर-घर में इस्तेमाल होते हैं अब गंभीर स्थिति उत्पन्न होने के बाद सरकार को चाहिए कि वर्क के हर प्लांट में सैंपलों की रूटीन में जांच हो क्योंकि यह लोगों की शेष से जुड़ा हुआ मामला होने के साथ-साथ सरकार के ब्रांड की गुणवत्ता भी संदिग्ध हो गई है विपक्ष हुआ मुखर मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। यह गंभीर लापरवाही है और इससे वेरका ब्रांड की छवि को नुकसान पहुंचा है। अमरिंदर सिंह राजा वडिंग कांग्रेस अध्यक्ष, बाजवा बोले-कांग्रेस के सीनियर नेता प्रताप सिंह बाजवा का कहना है कि खाने पीने की वस्तुओं की जांच के बारे में लापरवाही ने वेरका को भी इस हालत में पहुंचा दिया है कि उसका मिल्क पाउडर भारतीय सेना द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। मजीठिया ने कहा-लोगों की सेहत से खिलवाड़ शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने कहा कि देश की सशस्त्र सेना (आर्मी) को सप्लाई किए जाने में दूध में बाहरी कांड मिलने के बाद सरकार की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। देश की सशस्त्र सेना (आर्मी) ने वेरका, जो पंजाब सरकार का एक सहकारी संस्थान है, द्वारा सप्लाई किए गए सूखे दूध को पूरी तरह खारिज कर दिया। सवाल उठ रहा है कि यही दूध पंजाब में बिना जवाबदेही के बेचा जा रहा है और करोड़ों लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है। सेना द्वारा सैंपल रिजेक्ट किए जाने से सरकार के दावों की पोल खुलने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि दिल्ली में वेरका की अपील भी खारिज हो चुकी है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जबकि लैब रिपोर्ट में सैंपलों में मेटल और काले कण होने का दावा किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की हालत पहले ही खराब स्वास्थ्य विभाग के फूड विंग की हालत पहले ही खराब बताई जाती है अब जो विभाग मुख्यमंत्री के पास है वहां जाने के लिए फूड विंग के अधिकारी हिम्मत नहीं जुटा पाते के वेरका के दूध उत्पादों के अलावा शराब के सैंपल लेने में भी स्वास्थ्य विभाग के फूड विंग द्वारा नहीं लिया जाते क्योंकि उन्हें डर होता है कि शराब बेचने वाली लाबी काफी प्रभावशाली है और इसकी कमान भी सीधे मुख्यमंत्री ही देखते हैं इसलिए किसी उच्च अधिकारी के निर्देशों के बाद ही वह भी शिकायत आने पर साल में एक आध बार कभी शराब ,बीयर आदि का सैंपल लिया जाता है एक अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छोटे-मोटे सैंपल लेने के अवसर पर भी सिफारिश के लिए कई फोन आ जाते हैं जिसमें ब्लॉक स्तर से लेकर विधायक स्तर के लोग शामिल होते हैं कि जहां से सैंपल ले रहे हो वह उनका आदमी है इसे छोड़ दो ऐसे में वह क्या करें सरकार को चाहिए कि वह स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करें ताकि सभी जिलों में फूड विंग की टीमे खुलकर काम कर सके