फगवाड़ा/यूटर्न/26 मार्च। फगवाड़ा के हदियाबाद क्षेत्र में स्थित माता मनसा देवी (ज्वाला जी) मंदिर एक प्राचीन शक्तिपीठ है। मुख्य बस स्टैंड से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस प्राचीन मन्दिर को लेकर लोक मान्यता है कि लगभग पांच सौ वर्ष पूर्व राजा अकबर का सेनापति बीरबल जब अपनी सेना के साथ युद्ध के लिये जा रहा था तो उसकी सेना इस स्थान पर कुछ समय के लिए विश्राम के लिये रुकी थी। तब सेनापति बीरबल ने युद्ध में विजय प्राप्ति हेतु मां भगवती का यहां पर आवाहन करते हुए स्वरूप की स्थापना की थी। सनातन धर्म में अनेकों देवी-देवता हैं, जिनका अपना विशेष महत्व है। इन्हीं में एक माता मनसा देवी भी हैं। जिन्हें भगवान शिव की मानस पुत्री और नागराज वासुकी की बहन के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो भी मां मनसा के प्रसिद्ध शक्तिपीठ में श्रद्धा सहित आता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। फगवाड़ा के हदियाबाद में स्थित यह सनातन मंदिर मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर में माता शीतला देवी, भगवान श्री गणेश, भगवान शिव और देवी पार्वती की भव्य मूर्तियाँ स्थापित हैं। जिस स्थान पर वर्तमान समय में मां भगवती का शयन कक्ष स्थापित है वहां पर एक समय विशालकाय बरगद का वृक्ष हुआ करता था। जो अग्रिकांड में जलकर भस्म हो गया। किंतु उसमें से अग्नि की ज्वाला मंदिर के अंदर प्रकट हुई जिसके बाद श्री स्वामी गंगानन्द पर्वत जी महाराज के द्वारा पुन: मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। वर्तमान में श्री स्वामी शंकर नाथ पर्वत चैरिटेबल एवं वेलफेयर ट्रस्ट नकोदर रोड हदियाबाद फगवाड़ा के द्वारा ट्रस्ट की निगरानी में मंदिर का संचालन किया जा रहा है। प्रत्येक वर्ष चैत्र मास के नवरात्रों में यहां भारी मेला लगता है। जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा सहित शामिल होते हैं और मन वांछित फल पाते हैं। इस बार 25 मार्च दिन बृहस्पतिवार को अष्टमी के दिन मेले का शुभारंभ होगा। जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी कामना मन में लेकर माता मनसा देवी के समक्ष नतमस्तक होने पहुंचेंगे। प्रबंधकों के अनुसार मेल की तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। श्रद्दालुओं की सुरक्षा, जलपान, स्वास्थ्य एवं विश्राम की उचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि 26 मार्च दिन शुक्रवार को इस दो दिवसीय मेले का समापन कंजक पूजन के साथ किया जायेगा। इस अवसर पर स्वामी शंकर नाथ पर पर्वत चैरिटेबल एवं वेलफेयर ट्रस्ट के पदादिकारियों के आलावा मन्दिर के सेवादार एडवोकेट लोकेश नारंग, नरेश दुग्गल, राकेश दुग्गल, बृजभूषण जलोटा, विवेक हांडा, विनोद दुग्गल, रवि मंगल दुग्गल, डा. सतीश दुग्गल, आंचल दुग्गल, वरिंदर दुग्गल आदि उपस्थित थे।